
NCERT Deemed University Status Image Source: ChatGpt
NCERT Deemed University Status: देश के स्कूलों से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था NCERT (एनसीईआरटी) को अब एक बड़ा दर्जा मिल गया है। एनसीईआरटी को अब डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस मिला है। यह स्टेटस मिलने के बाद एनसीईआरटी का काम सिर्फ किताबें तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनसीईआरटी अब उच्च शिक्षा में भी अपनी भूमिका अच्छे से निभा पाएगा।
शिक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च 2026 को एक अधिसूचना जारी करके इसकी जानकारी दी। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) एक्ट, 1956 की धारा 3 के तहत एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी' घोषित किया है।
ये नया दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी जैसे कोर्स शुरू कर सकेगा। इसकी साथ ही एनसीईआरटी रिसर्च और नए तरह के अकादमिक प्रोग्राम भी चला पाएगा। एनसीईआरटी को मिला यह नया दर्जा शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे जहां एक तरफ नए अवसर खुलेंगे, वहीं दूसरी तरफ संस्थान की भूमिका और जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।
एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी के अंदर शामिल करने के बाद अब एनसीईआरटी पूरी तरीके से यूजीसी के नियमों के दायरे में आ जाएगी। यानी जो भी कोर्स या प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे, वे यूजीसी के तय किए गए मानकों के अनुसार ही होंगे। इसके अलावा जैसे बाकि संस्थाओ को ऑफ-कैंपस सेंटर या नए संस्थान खोलने के लिए यूजीसी की गाइडलाइन का पालन करना होता है वैसे ही अब एनसीईआरटी भी इन नियमों के दायरे में आकर ही काम कर पाएगी। नई व्यवस्था के तहत एनसीईआरटी को अब राष्ट्रीय रैंकिंग में हिस्सा लेना होगा और NAAC जैसे संस्थानों से मान्यता भी लेनी होगी। साथ ही अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) जैसे सिस्टम को भी लागू करना अनिवार्य होगा। इससे यह संस्थान पूरी तरह उच्च शिक्षा के ढांचे में शामिल हो जाएगा।
इस फैसले का सीधा असर शिक्षक शिक्षा और रिसर्च पर पड़ेगा। अब एनसीईआरटी अपने स्तर पर नए कोर्स डिजाइन कर सकेगा, जिससे शिक्षकों की ट्रेनिंग और शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकेगा। साथ ही यह संस्थान रिसर्च आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगा। इस फैसले के तहत एनसीईआरटी के छह प्रमुख संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन के साथ भोपाल स्थित केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं।
हालांकि इस फैसले को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी। कुछ शिक्षकों का मानना था कि यूजीसी के तहत आने से एनसीईआरटी की स्वतंत्रता कम हो सकती है। उनका तर्क था कि इससे संस्थान की पहचान एक स्वतंत्र शैक्षिक निकाय के रूप में कमजोर पड़ सकती है। लेकिन सरकार का मानना है कि इससे संस्थान और मजबूत होगा।
Published on:
03 Apr 2026 12:49 pm
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