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मात्र 9 प्रतिशत निजी स्कूल ही पूरे कर रहे आरटीई के मानक

NCERT-UNICEF ने मिलकर लॉन्च किया देश में शिक्षा की सही स्थिति बताने वाला पोर्टल

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Sunil Sharma

Aug 15, 2018

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प्रदेश में केवल 9.1 फीसदी निजी स्कूल ही आरटीई के तहत दी जाने वाली नि:शुल्क शिक्षा के मानक पूरे कर रहे हैं। इनमें सबसे खराब स्थिति डूंगरपुर जिले की हैं। यहां केवल 2.9 प्रतिशत निजी स्कूल ही आरटीई के तहत गरीब बच्चों को सही शिक्षा का वातावरण दे रहे हैं।

डूंगरपुर के अलावा उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, जैसलमेर, बीकानेर की स्थिति भी ठीक नहीं है। ये सभी जिले रेड जोन में हैं। वहीं सबसे अच्छी स्थिति हनुमानगढ़ जिले की है। यहां 15.5 फीसदी स्कूल आरटीई के मानक पूरे कर रहे हैं। साल 2011-12 में यह आंकड़ा 7.3 फीसदी पर था, वह छह साल में बढक़र केवल 9.1 प्रतिशत तक पहुंचा है। प्रदेश में आरटीई के तहत शिक्षा की पोल खोलती रिपोर्ट केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड है।

दरअसल, एनसीईआरटी व यूनिसेफ ने मिलकर देश में शिक्षा की स्थिति बताने वाला पोर्टल लॉन्च किया है। जिस पर राष्ट्रीय स्तर से लेकर ब्लॉक लेवल के शिक्षा से जुड़े सभी आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं।

डिजिटल इंडिया के दौर में कम्प्यूटर हुए कम
एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया की मुहिम चला रही है। दूसरी तरफ स्कूलों में कम्प्यूटर भी घटा रही है। पिछले पांच वर्षों में कम्प्यूटरों की संख्या वाले स्कूलों की संख्या 17.3 फीसदी तक घटी है। साल 2012-13 में जहां 33.2 फीसदी सैकण्डरी स्कूलों में कम्प्यूटर थे, 2016-17 में घटकर केवल 15.9 फीसदी स्कूलों में रह गए। सरकारी स्कूलों की बात करें तो केवल 14.1 फीसदी स्कूलों में कम्प्यूटर हैं। जबकि 2012-13 में 29.8 प्रतिशत स्कूलों में कम्प्यूटर थे।

केवल 36.3 फीसदी स्कूलों में साइंस लैब
यहां सैकण्डरी स्कूलों की भी स्थिति अच्छी नहीं है। केवल 36.3 फीसदी स्कूलों में ही साइंस लैब मौजूद है। वहीं सरकारी स्कूलों की स्थिति निजी की अपेक्षा अधिक खराब है। 46.1 फीसदी निजी स्कूलों में जहां साइंस लैब हैं, वहीं केवल 26.4 फीसदी सरकारी स्कूलों में लैब हैं। इस मामले में भी जनजातीय जिले पिछड़े हुए हैं।

यहां मिलेगी जानकारी
एनसीईआरटी और यूनिसेफ के वेबपोर्टल http://udise.schooleduinfo.in/ पर देश से लेकर ब्लॉक लेवल का स्कूलों से जुड़ा हर डेटा उपलब्ध है। मई माह में लॉन्च किए गए पोर्टल में यू-डाइस व एनएएस सर्वे की अलग-अलग रिपोर्ट है। इसके साथ ही डेमोग्राफिक व सोशल इकॉनोमी के जनगणना के आंकड़े पोर्टल पर उपलब्ध हैं। पोर्टल के साथ ही मोबाइल ऐप पर भी यह जानकारी मौजूद है। इसे देखने-समझने के साथ ही डाउनलोड करना व शेयर करना भी आसान हैं।