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प्री-स्कूल होता है सबसे अहम : शोध

अनुसंधान बताता है कि प्री-स्कूल में अगर बच्च उच्च गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं तो उन्हें बाद में अच्छी आमदनी होती है

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Jameel Ahmed Khan

Sep 27, 2017

Pre School

Pre School

वॉशिंगटन। अमरीका में हुए हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है कि बच्चे के जीवन में सबसे अहम वर्ष प्री-स्कूल होता है। यह बच्चों में उत्सुकता पैदा करने में मदद करता है कि चीजें कैसे काम करती हैं और समस्याओं का समाधान कैसे मिलता है। शिक्षा शोधकर्ता सुजेन बोफार्ड का यह शोध आलेख 'द मोस्ट इम्पोर्टेंट ईयर' हाल ही में छपा है। उन्होंने बताया कि यह वह समय होता है, जब गणित की अवधारणाओं के बारे में बच्चे सीखते हैं।

इस दरमियान वह न सिर्फ आकृतियों को पहचानते हैं या संख्याओं के नाम याद करते हैं, बल्कि यह भी जानते हैं कि गणित का उपयोग कैसे करते हैं। इसी समय वह समूह का हिस्सा कैसे बनना है यह भी सीखते हैं। अनुसंधान बताता है कि प्री-स्कूल में अगर बच्च उच्च गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं तो उन्हें बाद में अच्छी आमदनी होती है और वे अपराधी भी नहीं होते।

जानिए, क्यों अपनी 800 साल पुरानी परंपरा बंद करेगी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी
लंदन। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी अपनी 800 साल पुरानी एक परंपरा बंद करने जा रही है। यूनिवर्सिटी अपनी लिखित परीक्षा बंद करने जा रही है। इसका मुख्य कारण विद्यार्थियों की खराब होती जा रही लिखाई को माना जा रहा है। लिखाई की जगह आईपैड या लैपटॉप के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि लैपटॉप पर विद्यार्थियों के बढ़ते भरोसा की वजह से उनकी लिखावट में गिरावट आ रही है।

यूनिवर्सिटी में इतिहास की वरिष्ठ लेक्चरर डॉक्टर सारा पीयरसाल ने बताया कि आज की जनरेशन के विद्यार्थी अपनी लिखाई को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह 'खोती' जा रही है। उन्होंने आगे कहा, कि १५-२० साल पहले विद्यार्थी घंटों तक नियमित रूप से कुछ न कुछ लिखते रहते थे। लेकिन, आज वे लगभग कुछ भी नहीं लिखते हैं सिवाए परीक्षा के। ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार 'द टेलीग्राफ' में छपी खबर के अनुसार, लिखावट में आ रही गिरावट के चलते इस साल प्रायोगिक तौर पर इतिहास की परीक्षा टाइपिंग के जरिए ली गई।

पढऩे में आ रही थीं दिक्कतें
सारा ने कहा कि शिक्षक के रूप में पिछले कई सालों से लिखावट में आ रही गिरावट को लेकर हम लोग काफी चिंतित थे। निश्चित तौर पर लिखावट में आ रही गिरावट को देखा जा सकता है। विद्यार्थियों और परीक्षक को परीक्षा के दौरान क्या लिखा है, पढऩे में मुश्किलें आ रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि क्या लिखा है, इसको लेकर केंद्रीय तौर पर प्रतिलेखन किया जा रहा था। यानि जिन विद्यार्थियों की लिखावट बेहद खराब थी, उन्हें गर्मियों की छुट्टियों में कॉलेज वापस आने के लिए कहा जाता था ताकि यूनिवर्सिटी के दो प्रशासकों के सामने जोर जोर से अपने उत्तर को पढ़कर बताएं। सारा ने कहा कि यूनिवर्सिटी का इसे आश्चर्यजनक सराहनीय कदम कहा जाएगा कि वह अपनी परीक्षा कार्यप्रणाली में बदलाव लाने के लिए गंभीरता से सोच रही है। हालांकि, बहुत से लोग इस बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।

ब्रिटिश इंस्टीट्यूट ऑफ ग्राफोलोजिस्ट में लेखन विशेषज्ञ ट्रेसी टू्रसेल ने कहा कि कैंब्रिज विद्यार्थियों को हाथ से लिखने पर जोर दे, खासकर लेक्चर के दौरान। उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में आईपैड, लैपटॉप का चलन बढ़ा है, लेकिन यह जरूरी है कि बच्चे हाथ से ही लिखें। इस बात की भी चिंता है कि कैंब्रिज का रास्ता अपनाते हुए स्कूल भी लिखने के लिए आईपैड, लैपटॉप पर जोर दें।