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न विशेषज्ञ शिक्षक और न मान्यता, फिर भी करवा रहे बीटेक-एमटेक

भारी भरकम फीस लेने के बाद भी टेक्नोलॉजी के छात्रों को फिजिक्स-कैमिस्ट्री-बॉटनी के एमएससी व पीएचडी किए हुए शिक्षक तकनीक का ज्ञान दे रहे हैं।
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Amanpreet Kaur

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Jun 16, 2018

Rajasthan University

Rajasthan University

राजस्थान विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर कन्वर्जिंग टेक्नोलॉजी (सीसीटी) में बिना विशेषज्ञ शिक्षकों और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की मान्यता बगैर बीटेक व एमटेक की पढ़ाई करवा डिग्रियां दी जा रही हैं। भारी भरकम फीस लेने के बाद भी टेक्नोलॉजी के छात्रों को फिजिक्स-कैमिस्ट्री-बॉटनी के एमएससी व पीएचडी किए हुए शिक्षक तकनीक का ज्ञान दे रहे हैं।
इस बात को छिपाने के लिए विवि ने अलग-अलग कमेटियां बनाकर पद देने की आड़ ली हुई है। स्व वित्त पोषित (सेल्फ फाइनेसिंग कोर्स) सेंटर में एक भी पूर्णकालिक शिक्षक नही हैं। ये तथ्य सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी में सामने आए हैं। सेंटर की हालत देख छात्र संख्या तेजी से घट रही है। यह कोर्स चलाने के लिए विवि की सिंडीकेट ने ही 12 वर्ष पहले निर्णय किया था।

लैब टैक्नीशियन भी बना हुआ है गेस्ट फैकल्टी

सेंटर में पढ़ाने के लिए गेस्ट फैकल्टी के तौर पर बाहर से 40-45 शिक्षक यहां आ रहे हैं। उनमें से केवल दस ही इंजीनियरिंग डिग्रीधारी हैं। सूचना के अधिकार के तहत मिली सूचना के अनुसार एसएमएसअस्पताल के एक लैब टैक्नीशियन को भी गेस्ट फैकल्टी में शामिल किया हुआ है। हालांकि, विश्वविद्यालय का तर्क है कि वह सेंटर में लैब टैक्नीशियन है।

यहां से आ रहा है फंड

सें. फॉर ए. इन नैनो टेक्नोलिजी-डीएसटी राजस्थान, 2011-16: 13 करोड़
डिजाइन इनोवेशन सेंटर - एमएचआरडी, दिल्ली, 2015-18 : 10 करोड़
यूनिवसिर्टी इनोवेशन क्लस्टर - बीआईआरएसी, 2014-19 : 2.22 करोड़
इंटरडिसिप्लिनरी प्रो.इन लाइफ साइंस - डीबीटी, 2010-15 : 13 करोड़

गत वर्ष 17 प्रवेश, इस साल के प्रवेश शुरू

पिछले सत्र में केवल १७ छात्रों ने ही बी.टेक-एम.टेक कोर्स में प्रवेश लिया है। विवि ने इस साल भी प्रवेश प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई रखी गई है।

...फिर भी पीएचडी

आरटीआइ से मिली सूचना के अनुसार वर्तमान में सीसीटी से पांच छात्र नैनो व बायोटेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे हैं। जबकि यहां एक भी पूर्णकालिक स्थाई शिक्षक नहीं है। पांच साल पहले बी.टेक-एम.टेक के कोर्स में 80 छात्रों ने प्रवेश लिया था। इनमें से अब सिर्फ 70 छात्र बचे हैं। दस छात्र बीच सत्र में चले गए। वहीं सीसीटी के प्रथम बैच के छात्र आज भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं।