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भाषा के नाम पर राजनीति के बीच चौंकाने वाले नतीजे, महाराष्ट्र में 80 हजार स्टूडेंट्स मराठी में फेल

Maharashtra Board Result 2026: महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड ने 8 मई को कक्षा 10 यानी एसएससी परीक्षा 2026 के रिजल्ट जारी कर दिए हैं। इस साल का पास प्रतिशत काफी अच्छा रहा लेकिन, इन नतीजों के साथ एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

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मुंबई

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Mohsina Bano

May 09, 2026

Ssc result 2026 maharashtra board topper

maharashtra ssc result 2026 (Image- Gemini)

Maharashtra 10th Board Result 2026: महाराष्ट्र में जहां एक तरफ मराठी भाषा को लेकर हमेशा राजनीति गरमाई रहती है वहीं, अब शिक्षा से जुड़ी बहुत हैरान करने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं क्लास के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं। इस साल पूरे राज्य का रिजल्ट काफी अच्छा रहा है लेकिन 80 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स अपनी मातृभाषा मराठी के पेपर में ही फेल हो गए हैं। राज्य में साइनबोर्ड से लेकर रोजगार तक हर जगह मराठी को अनिवार्य करने की राजनीति के बीच बच्चों का अपनी ही भाषा में न्यूनतम पासिंग मार्क्स भी न ला पाना शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कैसा रहा इस बार का ओवरऑल रिजल्ट

इस साल 10वीं की परीक्षा के लिए 16 लाख 14 हजार 50 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 16 लाख 164 स्टूडेंट्स एग्जाम देने पहुंचे थे। इनमें से कुल 14 लाख 52 हजार 246 स्टूडेंट्स ने एग्जाम पास की है। राज्य का कुल पास परसेंटेज 90.75 रहा है जो एक शानदार आंकड़ा है। रेगुलर स्टूडेंट्स ने 92.09 परसेंट के साथ बहुत बेहतरीन परफॉर्मेंस दि है लेकिन, मराठी सब्जेक्ट में इतने सारे बच्चों का फेल होना इस शानदार सफलता के बीच चिंता का कारण बन गया है।

आखिर क्यों मातृभाषा में फेल हो रहे बच्चे

शिक्षा विशेषज्ञों ने मराठी में इतने भारी पैमाने पर स्टूडेंट्स के फेल होने के कुछ मुख्य कारण बताए हैं:

  • इंग्लिश मीडियम के स्कूलों और पढ़ाई की तरफ पेरेंट्स और स्टूडेंट्स का तेजी से बढ़ता हुआ रुझान।
  • सोशल मीडिया का लगातार बढ़ता प्रभाव जो बच्चों को उनकी मूल भाषा के साहित्य से काफी दूर कर रहा है।
  • मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में खुद से लिखने की आदत खत्म हो रही है जिससे राइटिंग प्रैक्टिस छूट गई है।
  • प्रैक्टिस न होने के कारण बच्चे अपनी मातृभाषा की व्याकरण और स्पेलिंग में सबसे ज्यादा गलतियां कर रहे हैं।

जमीनी स्तर पर बदलाव की जरूरत

यह चौंकाने वाले नतीजे इस बात का साफ संकेत हैं कि भाषा को लेकर केवल कड़े राजनीतिक नियम बनाना ही काफी नहीं है। सरकार और शिक्षा विभाग को जमीनी स्तर पर स्कूलों में मातृभाषा को ज्यादा प्रभावी तरीके से पढ़ाने और स्टूडेंट्स में इसके प्रति रुचि जगाने के लिए तत्काल कुछ ठोस कदम उठाने होंगे ताकि, भविष्य में ऐसे नतीजे दोबारा देखने को न मिलें।