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देश के 8.5% स्कूली बच्चे तंबाकू की चपेट में, लड़कियां भी नशे की गिरफ्त में

Youth Tobacco Addiction: भारत में स्कूली बच्चों के बीच तंबाकू का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 13 से 15 साल के 8.5 फीसदी बच्चे नशे की गिरफ्त में हैं। जानिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर DU में विशेषज्ञों ने इस गंभीर मुद्दे पर क्या कुछ कहा।

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भारत

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Mohsina Bano

May 26, 2026

World No Tobacco Day 2026

Global Youth Tobacco Survey India (Image- Gemini)

Tobacco Addiction in India: भारत में स्कूली बच्चों के बीच तंबाकू और निकोटिन की लत एक बड़ी और गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 13 से 15 साल की उम्र के लगभग 8.5 फीसदी स्कूली बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एक राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें, विशेषज्ञों ने जागरूकता और सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई।

DU में हुआ राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन

31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसी अवसर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के सामाजिक कार्य विभाग और सोशियो इकोनॉमिक्स एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (SEEDS) की ओर से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस परामर्श का मुख्य विषय आकर्षण को बेनकाब करना और निकोटिन व तंबाकू की लत का मुकाबला करना रखा गया था। इस मौके पर जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और युवा प्रतिनिधियों ने युवाओं को तंबाकू से बचाने के लिए तुरंत और मजबूत कदम उठाने की मांग की।

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार:

  • देश में 13 से 15 वर्ष की आयु वाले 8.5 फीसदी स्कूली बच्चे तंबाकू की गिरफ्त में हैं।
  • लड़कों में तंबाकू सेवन का आंकड़ा 9.6 फीसदी है।
  • लड़कियां भी इस मामले में पीछे नहीं हैं और 7.4 फीसदी लड़कियां नशे का शिकार हो चुकी हैं।

पैसिव स्मोकिंग का भी बड़ा खतरा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि, केवल सीधे तौर पर नशा करने वाले बच्चे ही खतरे में नहीं हैं। लगभग 29.5 फीसदी स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो खुद नशा नहीं करते लेकिन दूसरों के धूम्रपान करने (पैसिव स्मोकिंग) के कारण इसके संपर्क में आ रहे हैं और उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ी के लिए इसके परिणाम बहुत खतरनाक होंगे। इसके लिए सरकार, स्कूल प्रशासन और माता-पिता सभी को मिलकर सख्त कदम उठाने होंगे।