Virtual School of NIOS: जानें क्या है वर्चुअल स्कूल, बच्चों को कैसे मिलेगा इसका लाभ?

 

Virtual School of NIOS: भारत में वर्चुअल स्कूल अपनी तरह की पहली पहल है। यह छात्रों को वर्चुअल लाइव क्लासरूम और वर्चुअल लैब्स के माध्यम से एडवांस डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। साथ ही गैर-पारंपरिक दृष्टिकोणों के जरिए छात्रों में सीखने और पढ़ने के पैटर्न पर जोर देगा।

By: Dhirendra

Updated: 25 Aug 2021, 05:45 PM IST

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत दो दिन पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान के वर्चुअल स्कूल ( Virtual School of NIOS ) का शुभारंभ किया। उसके बाद से देशभर में वर्चुअल स्कूल को लेकर चर्चा चरम पर है। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि वर्चुअल स्कूल क्या है, कोरोना महामारी के दौर में यह छात्रों के लिए किस रूप में लाभकारी साबित होगा। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकारों की वर्चुअल स्कूल्स को लेकर तैयारियां क्या हैं?

क्या है Virtual School?

Virtual School यह भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक नया और अलहदा मॉडल है। इस मॉडल के तहत प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ देशभर के बच्चों को दिलाना है। ताकि इसके जरिए अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सके। भारत में वर्चुअल स्कूल अपनी तरह की पहली पहल है। यह देश में वर्चुअल लाइव क्लासरूम और वर्चुअल लैब्स के माध्यम से एडवांस डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा। वर्चुअल स्कूल भारत में ऐसा पहला स्कूल है जो गैर-पारंपरिक दृष्टिकोणों के जरिए छात्रों में कुछ सीखने और पढ़ने के पैटर्न पर जोर देगा।

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ये है Virtual School of NIOS का मकसद

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के वर्चुअल स्कूल ( Virtual School of NIOS ) का मकसद बच्चों में सीखने की क्षमता को बढ़ाने, डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने, छात्रों में बुद्धिमत्ता के साथ सस्ती और विश्व स्तरीय शिक्षा पहुंचाना है। इसके अलावा तीन साल तक के बच्चों में अंकगणितीय क्षमता में बढ़ोतरी करना है।

3 से 9 साल के बच्चों पर सबसे ज्यादा जोर

देश में की 3 से 9 साल के 7.5 करोड़ छात्रों को स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने, पढ़ने-लिखने और अंकगणित में कुशल बनाने के लिए ई-संसाधन या वर्चुअल स्कूल शिक्षक के बीच की दूरी को कम करना, शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के वर्चुअल स्कूल ( Virtual School of NIOS ) योजना के तहत 3 से 9 साल तक के बच्चों को केंद्र में रखा गया है। विकलांग छात्रों को सीखने और पढ़ने का अवसर प्रदान करेगी और वे समान रूप से भाग ले सकेंगे।

अब बच्चे स्कूल में सीखेंगे साइबर सुरक्षा के गुर

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग की वर्चुअल स्कूल ( Virtual School of NIOS ) के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिमोट प्रॉक्टेड व्यवस्थाओं के माध्यम से भी परीक्षा आयोजित की जाएगी। एनआईओएस के वर्चुअल स्कूल में पारंपरिक शिक्षा के प्रति एक डिजिटल दृष्टिकोण होगा और यह छात्रों को साइबर सुरक्षा जैसी अवधारणाओं से रूबरू कराएगा। इस तरह का प्रशिक्षण नियमित स्कूली शिक्षा के साथ आयोजित किया जाएगा। ये स्कूल प्रयोगशालाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे और व्यावहारिक दृष्टिकोण के माध्यम से छात्रों को प्रशिक्षित करेंगे।

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एक्टिविटी बेस्ड होंगी क्लासें

इसके अलावा वर्चुअल स्कूल ( Virtual School ) एडवांस डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को पढ़ाना और प्रशिक्षित करने का भी है। इस योजना के तहत 9वीं से 12वीं क्लास तक के छात्रों के पास स्कूलिंग चुनने का ऑप्शन होगा। इसकी खास बात यह है कि इसके जरिए लगने वाली क्लास एक्टिविटी बेस्ड होंगी। इसमें टेक्स्ट बुक का पूरा सिलेबस भी होगा। छात्रों के लिए पूरी शिक्षा प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसमें शिक्षण, लाइव इंटरएक्टिव कक्षाएं, रिकॉर्ड किए गए सत्र और वीडियो, ट्यूटर चिह्नित असाइनमेंट, मूल्यांकन और परीक्षा और प्रमाणन शामिल हैं।

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