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यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स के टॉपर बने विशाल रांका

विशाल ने मास्टर ऑफ साइंस इन बिजनेस एनालिटिक्स (एमएसबीए) में फुल ग्रेड्स हासिल किए हैं

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Amanpreet Kaur

May 24, 2018

Vishal Ranka

Vishal Ranka

दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी का एक स्टूडेंट, जो स्कूल में एवरेज स्टूडेंट रहा, जिसने तीन साल पहले एक स्टार्टअप शुरू किया और वह फेल हो गया, लेकिन उसी स्टूडेंट ने आज दुनिया के टॉप संस्थानों में शुमार यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, बोस्टन के एमबीए प्रोग्राम में दुनियाभर के स्टूडेंट्स के बीच टॉप कर दिखाया है। ये हैं जयपुर के विशाल रांका। विशाल ने मास्टर ऑफ साइंस इन बिजनेस एनालिटिक्स (एमएसबीए) में फुल ग्रेड्स हासिल किए हैं। विशाल ने पत्रिका प्लस से खास बातचीत में बताया कि एमबीए प्रोग्राम टॉप करने के लिए थ्योरिटकल के अलावा प्रैक्टिकल नॉलेज और एक्स्ट्रा कॅरिकुलर एक्टिविटीज को जज किया गया। वे यूनिवर्सिटी से एमबीए फाइनेंस में भी डिग्री कर रहे हैं, जिसका रिजल्ट आना बाकी है। विशाल के पिता उत्तम चंद रांका शहर के एक बिजनेसमैन और मां चंदा हाउसवाइफ हैं।

हासिल किए 670 मार्क्स

स्कूलिंग के बाद उन्होंने बेंगलुरू से कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की। चार साल तक इंडस्ट्री में काम करने के बाद उन्होंने जयपुर में स्टार्टअप ‘डिलीवरी काका’ की शुरुआत की। यह स्टार्टअप फेल हो गया तो उन्होंने जीमैट एग्जाम दिया, जिसमें उन्होंने 800 में से 670 मार्क्स हासिल किए। विशाल का कहना है कि एंंट्रेंस के लिए इंग्लिश और मैथ्स बेहतर होनी चाहिए। मेरी स्कूलिंग अच्छी रही, लेकिन एक एेवरेज स्टूडेंट ही रहा, एंट्रेंस के लिए मैंने चार-पांच महीने मैथ्स और इंग्लिश पर काफी काम किया।

फिर एेसे किया एमबीए टॉप

विशाल का कहना है कि यूनिवर्सिटी टॉप करना इतना आसान नहीं था। थ्योरी की पढ़ाई के अलावा एक्स्ट्रा कॅरिकुलर एक्टिविटीज में एक्टिव रहना होता है। मैंने वहां फाइनेंशियल मीडिया सैल स्टार्ट किया था। इसमें मैंने बोस्टन में कई बड़े ग्रुप्स और बिजनेस टाइकूंस के इंटरव्यूज किए। इसके अलावा नेटवर्र्किंग इवेंट्स अटेंड करने, यूनिवर्सिटी के बाहर से कोर्स करने और कई इनिशिएटिव लेने की वजह से मेरी परफॉर्मेंस को सराहा गया। उन्होंने कहा कि इंडिविजुअल डिग्री करना चैलेंजिंग होता है। इसमें प्रेक्टिकल वर्क काफी होता है। सभी स्टूडेंट्स एक जैसी चीजें करते हैं, एेसे में आपको टॉप करने के लिए एक्स्ट्रा और आउट ऑफ द बॉक्स चीजें करनी होती हैं।

ऑफिशियल क्रिकेट क्लब बनाया

विशाल क्रिकेट क्रेजी हैं। इतने कि पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट को प्रायोर्रिटी पर रखते हैं। वे कहते हैं कि कई बार एग्जाम से पहले मैंने क्रिकेट खेला है। मैं एग्जाम छोड़ सकता हूं, क्रिकेट नहीं। उन्होंने एक साल पहले यूनिवर्सिटी में ऑफिशियल क्रिकेट क्लब की भी शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि इससे अभी तक 100 से ज्यादा स्टूडेंट्स और अन्य लोग जुड़ चुके हैं। इससे पहले क्रिकेट के बारे में वहां इतनी अवेयरनैस नहीं थी। हम स्टूडेंट्स की मेहनत का ही परिणाम है कि कॉलेज को अमेरिकन कॉलेज क्रिकेट एसोसिएशन में जगह मिल चुकी है और सालभर के अंदर ही इसे तीसरे-चौथे स्थान पर लाया जा चुका है। वे स्टेट लीग भी खेल रहे हैं।

फेलियर से सीखा

विशाल ने 2015 में खुद का स्टार्टअप किया था। यह फेल हो गया था। उन्होंने कहा कि मैंने इसमें अपना १०० परसेंट एफर्ट दिया था। सालभर में सिर्फ दो या तीन ही छुट्टी लीं। मेरे सामने बड़े कॉम्पिटीटर थे, टीम भी छोटी थी, लेकिन अब पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं पुरानी गलतियों से सीख लेते हुए बैटर रिसर्च के साथ मार्केट में कदम रखूंगा। विशाल का कहना है कि यदि फेलियर्स से डर जाएंगे तो आगे कैसे बढ़ पाएंगे, इसलिए मैं जल्द ही इससे मूव ऑन कर गया। मैं अब जो भी करूंगा, उसमें कोई कॉम्पिटीटर नहीं होगा।