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Uttar Pradesh Assembly Elections 2022: डैमेज कंट्रोल में जुटी बीजेपी, भूमिहारों का वोट बिखरने से बचाने को झोंकी ताकत

Uttar Pradesh Assembly Elections 2022 के इस बार के चुनाव में बीजेपी ने किसी भूमिहार को टिकट नहीं दिया है। यहां तक कि रोहनिया के विधायक सुरेंद्र सिंह का भी टिकट कट गया है। ऐेसे में भूमिहार समाज में आक्रोश रहा जिसे दबाने और मतों का बिखराव रोकने के लिए बीजेपी ने बिहार, गुजरात तक से सजातीयों को बुला लिया है। इसमें पीएम के नजदीकी एमएलसी एके शर्मा भी शामिल हैं जो रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में जुट गए हैं। जम्मूकश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा भी इन दिनों बनारस में ही प्रवास कर रहे हैं।

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यूपी विधानभा चुनाव 2022

यूपी विधानसभा चुनाव 2022

वाराणसी.Uttar Pradesh Assembly elections 2022 में वाराणसी में भूमिहार बिरादरी के मतदाताओं की नाराजगी से उबरने के लिए बीजेपी डैंमेज कंट्रोल में जुट गई है। बनारस और आसपास के जिलों ही नहीं बल्कि बिहार और गुजरात से भी बड़ी तादाद में भूमिहार बिरादरी से जुड़ नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा जा चुका है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और मऊ के मूल निवासी अरविंद कुमार शर्मा भी शामिल हैं। वैसे इन दिनों जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा भी बनारस में प्रवास कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने टिकट बंटवारे में हुई चूक की भरपाई में पूरी तरह से जुट गई है।

बता दें कि बीजेपी ने अपने परंपरागत वोट बैंक भूमिहार बिरादरी से इस चुनाव में कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। प्रत्याशी उतराना तो दूर एक विधायक जो थे उनका टिकट तक काट दिया गया। इससे भूमिहार बिरादरी में गहरी नाराजगी है। इससे संबंधित खबर भी पत्रिका ने तीन दिन पहले चलाई थी जिसमें ये बताया गया था कि आजादी के बाद से यह पहला मौका होगा जब वाराणसी में कोई भूमिहार जनप्रतिनिधि नहीं होगा। उस खबर के बाद बीजेपी चौकन्नी हुई और आनन-फानन में न केवल पड़ोसी राज्य बिहार बल्कि गुजरात और दिल्ली तक से भूमिहार बिरादरी से जुड़े नेताओं को बनारस में बुला लिया। बताया जा रहा है कि वर्तमान में चार हजार से ज्यादा लोग बीजेपी के लिए दिन-रात काम करने में जुटे हैं।

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इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी पूर्व नौकरशाह एमएलसी अरविंद कुमार शर्मा ने भी मऊ से बनारस आ कर डेरा डाल दिया है। यहां ये भी बता दें कि शर्मा सहित ज्यादा भूमिहार नेताओं का जमगट रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में लगा है। यही वो सीट है जहां से 2017 में बीजेपी के टिकट पर सुरेंद्र सिंह चुनाव जीते थे, पर गठबंधन में ये सीट अबकी बार अपना दल (सोनेलाल) के हिस्से में चली गई और अपना दल ने पटेल जाति के सुनील कुमार को मैदान में उतारा है। यहां ये भी बता दें कि रोहनिया सीट भूमिहार और पटेल बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र है। वैसे ये वही रोहनिया सीट है जहां से 2012 में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल पहली बार विधायक चुनी गई थीं।

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रोहनिया के अलावा वाराणसी संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो कुल मिला कर करीब दो लाख भूमिहार मतदाता हैं जिन्हें बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। ये वही मतदाता हैं जिन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को नकराते हुए बीजेपी प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के पक्ष में मतदान किया था। लेकिन तब इस बिरादरी के बड़े नेता पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का बड़ा योगदान रहा। सिन्हा को नरेंद्र मोदी का करीबी भी माना जाता है। ऐसे में 2022 के चुनाव में भी सिन्हा बनारस में प्रवास कर रहे हैं। उनका यहां से आसपास के जिलों खास तौर से गाजीपुर नियमित तौर पर आना-जाना हो रहा है। शुक्रवार को भी वो सुबह सुबह वाया चंदौली गाजीपुर रवाना हुए हैं। भले ही सिन्हा चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर नहीं जुटे हैं पर माना ये जा रहा है कि उनकी मौजूदगी ही बड़ा काम कर सकती है। दरअसल सिन्हा भले ही गाजीपुर के निवासी हों पर वो आईटी बीएचयू के पुरातन छात्र हैं। बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐेसे में उनका प्रभाव तो है ही।

वैसे वाराणसी के रोहनिया अलावा पूर्वांचल के गाजीपुर के मोहम्मदाबाद सीट बलिया की फेफना सीट, आजमगढ से गोपालपुर और जौनपुर के मछली शहर ससंदीय क्षेत्र की पिंडरा विधानसभा सीट पर बीजेपी के इन भूमिहार नेताओं ने ताकत झोंकी है।