Kerala Assembly Elections 2021 - तिरुवनंतपुरम जीतने वाली पार्टी ही केरल में सरकार बनाती है

Kerala Assembly Elections 2021 - वर्ष 2011 में लेफ्ट यूनाइटेड फ्रंट (LDF) ने यहां पर 14 में से 11 सीटें जीती थीं और केरल में सरकार भी बनाई थी। इसी तरह वर्ष 2016 में यूडीएफ ने यहां पर सर्वाधिक सीटें जीतने के साथ-साथ सरकार बनाने का दावा भी पेश किया।

By: सुनील शर्मा

Published: 19 Mar 2021, 02:11 PM IST

Kerala Assembly Elections 2021 - केरल विधानसभा चुनावों में तिरुवनंतपुरम एक ऐसा जिला है जहां जीतने वाली पार्टी केरल में सरकार बनाती है। अगर पिछले दो विधानसभा चुनावों वर्ष 2011 तथा 2016 में आए चुनावी नतीजों को देखा जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है। वर्ष 2011 में लेफ्ट यूनाइटेड फ्रंट (LDF) ने यहां पर 14 में से 11 सीटें जीती थीं और केरल में सरकार भी बनाई थी। इसी तरह वर्ष 2016 में यूडीएफ ने यहां पर सर्वाधिक सीटें जीतने के साथ-साथ सरकार बनाने का दावा भी पेश किया। इन्हीं आंकड़ों को ध्यान रखते हुए इस बार दोनों ही पार्टियां केरल के तिरुवनंतपुरम पर अपना पूरा जोर लगा रहे हैं। दोनों ही गठबंधनों के नेताओं का मानना है कि यदि किसी भी तरह यहां पर बढ़त बना ली तो फिर वो सरकार बना सकेंगे।

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हालांकि इसके अलावा भी कई अन्य पहलू हैं जिन पर निर्भर करता है कि इस बार कौनसी पार्टी केरल में सरकार बनाएगी। यहां सबसे रोमांचक मुकाबला अगर कहीं देखने को मिलेगा तो वो है नेमम विधानसभा सीट पर पर। वर्ष 2016 में यहां पर भाजपा अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने में सफल रही थी। इस तरह पूरे केरल में यही एकमात्र सीट है जहां भाजपा जीती, भाजपा अब अपनी इस सीट को खोना नहीं चाहती वहीं दूसरी ओर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने अपने फायरब्रॉंड नेता के. मुरलीधरन को यहां पर भाजपा के मुकाबले खड़ा किया है। अब देखना यह है कि क्या भाजपा अपनी इस एकमात्र सीट को बचा पाएगी या इस सीट के साथ राज्य की दूसरी अन्य सीटों पर भी जीत हासिल करने में सफल होगी।

राज्य की राजनीति के जानकारों का कहना है कि वर्तमान में यहां पर एलडीएफ अन्य दूसरी पार्टियों के मुकाबले ज्यादा मजबूत स्थिति में है और बहुत संभव है कि किसी तरह सरकार बनाने में भी कामयाब हो जाए। पिछले कुछ समय से हिंदूवादी संगठनों द्वारा लगातार की जा रही कड़ी मेहनत और लव जिहाद जैसे मुद्दों के चलते भाजपा भी कुछ हद तक अपनी उपस्थिति दर्शाने में कामयाब हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी भले ही ज्यादा सीटें न जीतें लेकिन उसकी टोटल वोट शेयरिंग का प्रतिशत बढ़ने की पूरी-पूरी संभावनाएं हैं।

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सुनील शर्मा
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