
BJP File Photo
लोकसभा चुनाव 2024 में एक बार फिर उत्तर प्रदेश हॉट प्रदेश रहेगा। भाजपा यूपी से अधिकतम सीट जीतने की कोशिश है। पार्टी अपनी रणनीति में लोकसभा चुनाव 2019 के रिजल्ट को आधार बनाएंगे। और उसी आधार पर चुनाव की रणनीति तैयार की जाएगी। बताया जा रहा है लोस चुनाव 2019 की 10 सीटें ऐसी भी थीं, जहां जीत और हार का अंतर काफी कम था। इसको ध्यान में रखते हुए इन सीटों को असुरक्षित सीटों के दायरे में रखा गया है। और इन 10 सीटों को जीतने के लिए तरकश के सभी तीर का उपयोग किया जाएगा।
मंथन हो रहा है, बन रही है रणनीति
वैसे तो लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा 16 सीटें हार गई थी। पर बाद में दो उपचुनाव में 2 सीटों को अपने खाते में जमा करा लिया। बाकी बची 14 सीटों में 10 कमजोर सीटों पर अब तगड़ी पकड़ बढ़ाने की कोशिश शुरू हो गई है। मंथन हो रहा है, रणनीति बन रही है। कोई चूक करने के मूड़ में नहीं है भाजपा।
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50 फीसदी वोट शेयर का टारगेट
माना जा रहा है कि अगर अंतिम वक्त विपक्ष की तरफ से कोई गइबंधन आकार लेता है तो उसका भी मुकाबला किया जा सके। दूसरे यूपी में इस पर लोस चुनाव 2024 में भाजपा की पूरी कोशिश होगी कि 50 फीसदी वोट शेयर के टारगेट को पार कर लिया जाए। लोस 2019 में भाजपा ने 49 फीसदी से अधिक वोट शेयर हासिल किया था।
चार लोस सीट पर था जीत का अंतर बहुत कम
लोस चुनाव 2019 में हारी 10 सीटों पर विपक्षी सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। चार लोकसभा सीट मछलीशहर, श्रावस्ती, मेरठ और मुजफ्फरनगर पर भाजपा के उम्मीदवारों की जीत का अंतर काफी कम था।
मछलीशहर - भोला नाथ भाजपा - 181 वोट - जीते
मेरठ - राजेंद्र अग्रवाल - 4729 वोट - जीते
मुजफ्फरनगर - संजीव बालियान - 6526 वोट - जीते
श्रावस्ती - राम शिरोमणि - 5320 वोट - जीते
बदायूं, सुल्तानपुर सीट कुछ खतरनाक स्थिति में है। इस पर कड़ी तैयारी की जरूरत है। वहीं पांच सीटों पर जीत सीध्ी थी पर नजर रखने की जरूरत है।
बदायूं - संघमित्रा मौर्य - 18,454 वोट - जीते
सुल्तानपुर - मेनका गांधी - 14,526 वोट - जीते
संतकबीर नगर - प्रवीण निषाद - 35,749 वोट - जीते
बस्ती - हरीश द्विवेदी - 30,354 वोट - जीते
बांदा - आरके सिंह पटेल - 58,938 वोट - जीते
बाराबंकी - उपेंद्र सिंह रावत - 1,10,140 वोट - जीते
धौरहरा - रेखा वर्मा - 1,60,611 वोट - जीते
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कर्नाटक चुनाव में हार के बाद भाजपा सतर्क
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में में कांग्रेस ने भाजपा को करारी मात दी। कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। इसका असर दिखा। कर्नाटक हार के बाद भाजपा थिंक टैंक ने देश के सबसे बड़े प्रदेश में अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया है।
हारी सीट के साथ कमजोर सीट पर भी रहेगी नजर
लोकसभा चुनाव 2019 के बाद प्रदेश में राजनीतिक स्थितियां बदल गई है। सपा-बसपा गठबंधन टूट गया। अब सपा-रालोद गठबंधन मुकाबला करने को तैयार है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने हारी सीटों के साथ-साथ कमजोर मानी जाने वाली सीटों को चिह्नित कर उन पर काम करने का निर्णय लिया है।
कमजोर लोस सीटों पर बनेगी नई रणनीति
कमजोर लोकसभा सीटों पर स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि पार्टी जुलाई से इन सीटों पर अपने बूथ स्तर कार्यकर्ता और पन्ना प्रमुखों को एक्टिवेट कर जनसंपर्क की रणनीति पर काम शुरू कर देगी। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इनमें से हर लोकसभा क्षेत्र के लिए पार्टी पदाधिकारियों का एक डेडिकेटेड ग्रुप बनाने पर विचार कर रही है। ग्रुप में वर्तमान सांसद, सभी मौजूदा और कुछ पूर्व विधायक, एमएलसी और जिला अध्यक्ष शामिल होंगे। अभियानों पर नजर रखने के लिए पार्टी एक लोकसभा प्रभारी नियुक्त करने की योजना बना रही है। बताया जा रहा है कि 2019 में हारी गई 16 लोकसभा सीटों पर जहां कड़ी चुनौती मिली है वहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय के लिए एक केंद्रीय मंत्री को नियुक्त किया जाएगा।
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यूपी की सभी 80 लोस सीट जीतने का लक्ष्य
पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है कि सभी 80 लोकसभा सीट को जीतने की योजना है। आने वाले दिनों में संरचनात्मक और रणनीतिक बदलाव हो सकते हैं।
Updated on:
27 Jun 2023 07:53 pm
Published on:
27 Jun 2023 07:52 pm
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