
रूपेश मिश्रा
लाइट... कैमरा... एक्शन एंड रोल...। यह शब्द चुनावी मैदान में कूदे नेताओं के लिए भी उपयोग किए जा रहे हैं। दरअसल, नेताजी इनदिनों युवाओं को रिझाने के लिए लाइट, कैमरा और एक्शन के फेर में फंसे हैं। हर हाथ में स्मार्टफोन और रील्स की दीवानगी ने नेताजी को रील्स और शार्ट फिल्म बनाने पर मजबूर कर दिया है। इस चुनाव में ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब नेताओं को रील्स बनाने का चस्का लगा है। इसे लेकर टीम तक तैनात कर रखी है। यह टीमें जनसंपर्क, मंदिर में मत्था टेकने और गाय को पूजने तक की रील्स बना रहे हैं।
क्योंकि सवाल तीन करोड़ वोटरों का है
प्रदेश में युवा वोटरों का अलग महत्व है। इनकी तादाद तीन करोड़ से भी ज्यादा है। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की बात करें तो इनकी संख्या 22 लाख और 30 से 39 साल के युवाओं की संख्या 1 करोड़ 45 लाख है। ऐसे में युवाओं को साध कर चलना और उनके मुताबिक कै्पेनिंग करना नेताओं की मजबूरी भी है।
ट्रेंडिंग गाने-भजनों का क्रेज, युवा करते हैं चयन
रील्स में कब कौन का गाना और धुन डाली जाएगी इसका चयन विशेषज्ञों की टीम करती है। जैसे टिकट मिलते ही भारी भीड़ और ड्रोन शॉट के साथ गाना बजेगा ‘आरंभ है प्रचंड’, नेताजी यदि किसी धार्मिक कार्यक्रम या मंदिर जा रहे हैं तो भजन का वो हिस्सा लगाया जाएगा जो इन दिनों सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग में है।
दिल्ली, हरियाणा की टीमों की मांग
यूं तो रील्स बनाने वालों की फौज इन दिनों सक्रिय है, लेकिन चुनावी समर में सबसे ज्यादा मांग दिल्ली और हरियाणा की टीम की है। टीम में 30 साल तक के युवा ही शामिल हैं। 50 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक चार्ज किए जा रहे हैं। ड्रोन और कैमरे बढ़ाने पर ये चार्ज दोगुना तक जा सकता है।
Updated on:
31 Oct 2023 07:36 am
Published on:
31 Oct 2023 07:35 am
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