
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। दरअसल, राजनीति के जानकार से लेकर टीवी चैनलों में होने वाले डीबेट तक में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की लड़ाई बताई जा रही थी। लेकिन जब मतपेटिंया खुली तो नतीजों ने सबको हैरत में डाल दिया।
18 साल से सत्ता की बागडोर संभाल रहे मामा शिव ने साबित कर दिया कि सूबे में अब भी उनका ही राज रहने वाला है। बता दें कि 230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में अब तक आए चुनावी नतीजों पर नजर डाले तो भाजपा 130 से ज्यादा सीटों के साथ प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है।
लाड़ली बहना योजना ने किया कमाल
मध्य प्रदेश में 18 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी मामा शिवराज सिंह चौहान ने अपने खिलाफ बने एंटी इंकबंसी को प्रो इंकबंसी में बदल दिया। इसमें उनकी सरकार की तरफ से बनाए गए लाड़ली बहना योजना ने अहम किरदार निभाया। बता दें कि मध्य प्रदेश की 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपये हर महीने दिये जा रहे हैं। इन योजनाओं ने शिवराज के लिए एक लाभार्यी वर्ग बना दिया। एमपी की 7 करोड़ आबादी में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों ने शिवराज को भर भर कर वोट दिया है।
इन महिलाओं लड़कियों के लिए शिवराज का नाम एक भरोसा था, इस पर उन्होंने यकीन किया। अनुमान है कि बीजेपी अगर कांग्रेस का परंपरागत वोटर माने जाने वाले एससी-एसटी वोट में भी सेंध लगाती नजर आ रही है तो इसके पीछे लाडली बहना योजना बताई जा रही है। एमपी की बेटियों ने शिवराज की इस स्कीम को भविष्य की गारंटी समझा और वोट दिया।
कमलनाथ के डेढ़ VS शिवराज के 18 साल
इस चुनाव में शिवराज ने न सिर्फ योजनाओं को प्रचारित किया। बल्कि अपने पुराने रिकॉर्ड का भी हवाला दिया और अपने 18 साल के गवर्नेंस की दुहाई दी। इस दौरान शिवराज ने गांव की बेटी और लाडली लक्ष्मी योजना का हवाला दिया। वहीं, उन्होंने 2018 से 2020 तक चली कमलनाथ के सरकार को लेकर जमकर निशाना साधा।
कल्याणकारी घोषणाओं की बाढ़
इसके अलावा शिवराज ने कल्याणकारी घोषणाओं की बाढ़ लगा दी। उन्होंने राज्य के 30 लाख जूनियर स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन और भत्ते में वृद्धि की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी तोहफा दिया और उनका वेतन 10,000 रुपये से बढ़ाकर 13,000 रुपये किया. इसके अलावा शिवराज ने रोजगार सहायकों का मानदेय दोगुना (9,000 रुपये से 18,000 रुपये) करने और जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और उपसरपंच और पंच जैसे नेताओं का मानदेय तीन गुना करने का भी वादा किया है।
हिन्दुत्व का सिक्का, बुलडोजर का फैक्टर
मध्य प्रदेश में हिंदुत्व की जड़ें काफी गहरी हैं। यही वजह है कि कथित सेकुलर कांग्रेस को भी एमपी में सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे चलना पड़ा। लेकिन मतदाताओं को जब चुनने की जरूरत हुई तो उन्होंने बीजेपी के ब्रांड वाले हिन्दुत्व को चुना। शिवराज राज्य में मंदिरों की तस्वीर बदल कर उन्हें आध्यात्मिकता के साथ साथ आधुनिकता का कलेवर देने में लगे हैं। केंद्र की बीजेपी भी इसी नीति पर चल रही है।
उज्जैन कॉरिडोर इसी का उदाहरण है। इसके अलावा शिवराज ने राज्य के चार मंदिरों- सलकनपुर में देवीलोक, ओरछा में रामलोक, सागर में रविदास स्मार्क और चित्रकूट में दिव्य वनवासी लोक के विस्तार और स्थापना के लिए 358 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इसके अलावा शिवराज ने उत्तर प्रदेश की तरह अपने यहां भी बुलडोजर ब्रांड की राजनीति का इस्तेमाल किया। उज्जैन में शोभायात्राओं पर पत्थर फेंकने वालों के घर बुलडोजर चले। उज्जैन में ही बच्ची के साथ रेप के आरोपी का घर बुलडोजर से ढहा दिया गया।
ब्रांड शिवराज के साथ बीमारु राज्य से मुक्ति
इन फैक्टर्स के अलावा मध्य प्रदेश में 16 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज वोटर्स के सामने खुद भी ब्रांड बन गए। इस पीरियड में एमपी बीमारु राज्यों की कैटेगरी से बाहर निकला है। कई शहरों का कायाकल्प हुआ है। लोगों ने काम करने के इस तरीके को पसंद किया, उन्हें ब्रांड शिवराज पर भरोसा नजर आया, इसलिए लोगों ने शिवराज को वोट दिया। यहां बीजेपी का डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर का सिद्धांत शिवराज के काम आया। जब योजनाओं का फायदा सीधे जनता के हाथ में पहुंचता है तो सरकार और सिस्टम पर उनका यकीन बढ़ जाता है। यही वजह रहा कि जनता उन्हें 5 बार वोट दे रही है।
Published on:
03 Dec 2023 12:15 pm
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