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UP Assembly Elections 2022 : निर्भया केस की वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा बसपा में हुईं शामिल, मायावती को सीएम बनाने का लिया संकल्प

UP Assembly Elections 2022 : सीमा समृद्धि कुशवाहा को वकालत करने के लिए कानपुर छोड़कर दिल्ली आना पड़ा था। यहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ट्रेनी वकील काम करना शुरू किया। निर्भया केस के वक्त भी सुप्रीम कोर्ट में ट्रेनी वकील ही काम कर रहीं थीं। जब निर्भया के साथ दरिंदगी हुई और फिर मौत हो गई तो लोगों के साथ सड़क पर प्रदर्शन करने वालों में सीमा कुशवाहा भी शामिल थीं।

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लखनऊ

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Amit Tiwari

Jan 20, 2022

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UP Assembly Elections 2022 : देश की सबसे सनसनीखेज निर्भया रेपकांड और हाथरस केस से चर्चा में आईं अधिवक्ता सीमा समृद्धि कुशवाहा ने गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली हैं। निर्भया केस की वकील रहीं सीमा कुशवाहा को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की मौजूदगी में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। माना जा रहा है कि वे बसपा से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ सकतीं हैं। सीमा कुशवाहा रेप पीड़िताओं के लिए मुफ्त में न्याय दिलाने की मुहिम भी चलाती हैं और निशुल्क उनके मुकदमे लड़ने का भी एलान कर रखा है। इसके अलावा अभी हाल ही में कानपुर में एक लड़की के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले में भी सीमा कुशवाहा ने आवाज उठाई थी। बसपा की सदस्यता लेने के बाद सीमा कुशवाहा ने मायावती को यूपी का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प भी लिया।

मूलरुप से इटावा की रहने वाली हैं सीमा कुशवाहा

बता दें कि सीमा समृद्धि कुशवाहा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के इटावा की रहने वाली हैं। इनका जन्म यहां के एक छोटे से गांव उग्गरपुर में हुआ। कई इंटरव्यू में उन्होंने ये बताया कि कैसे उनके यहां लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी परेशानियां झेलनी पड़ती थीं।

वकालत शुरू करने में आईं थी मुश्किलें

सीमा ने जब वकालत की पढ़ाई करनी शुरू की तो बहुत सारी मुश्किलें खड़ी हो गई। उनका परिवार कानूनी पढ़ाई करने के खिलाफ था। इसलिए उन्होंने ये तय किया था कि पढ़ाई के साथ काम भी करेंगी। जिससे पढ़ाई में किसी भी तरह की रुकावट ना आये।

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कानपुर छोड़कर जाना पड़ा था दिल्ली

सीमा समृद्धि कुशवाहा के अनुसार की डिग्री लेने के बाद कानपुर से वकालत की ट्रेनिंग शुरू की थी। लेकिन वह महिला वकीलों की हालत बेहद खराब थी आलम यह था कि महिला वकीलों के हाथ में केस जाने पर उन्हें सुनवाई की तारीख भी नहीं मिलती थी। इसलिए उन्हें कानपुर छोड़ दिल्ली आना पड़ा था। यहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ट्रेनी वकील काम करना शुरू किया। निर्भया केस के वक्त भी सुप्रीम कोर्ट में ट्रेनी वकील ही काम कर रहीं थीं।

निर्भया के दोषियों को दिलाई थी सजा

जब निर्भया के साथ दरिंदगी हुई और फिर मौत हो गई तो लोगों के साथ सड़क पर प्रदर्शन करने वालों में सीमा कुशवाहा भी शामिल थीं। सीमा के अनुसार एक शोक सभा मैं निर्भया के परिवार से मिली थी। उसी दौरान वह बातचीत करते हुए इतनी भावुक हो गई उन्होंने ये तय कर लिया कि हर हाल में निर्भया के दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगी।

दुष्कर्म पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए बनाया ट्रस्ट

इसलिए उन्होंने इस केस को लड़ने का निर्णय लिया था। इसके बाद सजा होने तक वह आखरी लड़ाई लड़ती रहीं। साल 2014 में सीमा कुशवाहा ने एक ट्रस्ट भी बनाया। ये ट्रस्ट दुष्कर्म पीड़िताओं को मुफ्त में न्याय दिलाने के लिए अदालत में केस लड़ने का काम करता है।