
क्या आज़म के वर्चस्व को तोड़ पाएगी बीजेपी?
UP Assembly Elections 2022: रामपुर अंग्रेजों के जमाने से देश की मशहूर रियासतों में से एक रही है। राजनीतिक नज़रिये से देखें तो यह उत्तर प्रदेश की कुछ उन गिनी-चुनी सीटों में से एक है जहाँ बीजेपी का आज तक खाता नहीं खुला। चाहे वो 90 के दशक का राम मंदिर लहर हो या फिर 2014 के बाद की मोदी लहर हो, बीजेपी यहाँ जीत को तरसती रही है। कभी रामपुर की सियासत में नवाब खानदान का छाया रहता था, लेकिन आजम खान के उभरने के बाद से नवाब खानदान की चमक फीकी पड़ने लगी। आज की तारीख में रामपुर और आजम खान एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। 2022 का विधानसभा चुनाव यहां बेहद दिलचस्प होने वाला है। वर्तमान में यह सीट सपा के कब्जे में हैं और विधायक तंजीम फातिमा हैं जो आजम खान की पत्नी हैं। वहीं इस बार बीजेपी ने आकाश सक्सेना को चुनाव मैदान में उतारा है तो उन्हें टक्कर देने के लिए सांसद होने के बावजूद आजम खान मैदान में उतर गये हैं।
आज़म खान
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और नौ बार रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रह चुके आजम खान किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं। अपने बयानों से ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले आजम खान का विवादों से भी बेहद गहरा रिश्ता है। 32 साल की उम्र में पहली बार रामपुर के विधायक बनने वाले आज़म ख़ान ने जनता दल (सेकुलर) के साथ अपनी सियासी पारी शुरू की थी। 1993 में जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया तो आज़म ख़ान इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे। कभी रामपुर में नवाब खानदान का सिक्का चलता था। लेकिन आजम खान नवाब खानदान से टकराने में भी कोई गुरेज नहीं की। बाद में आजम की सियासत जैसे-जैसे परवान चढ़ती गयी वैसे-वैसे नवाबी खानदान के दिन ढलने लगे। लेकिन योगी सरकार आने के बाद से आजम के सितारे भी गर्दिश में चले गये। आजम पर वर्तमान में 100 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं और फिलहाल वो जेल में हैं।
आकाश सक्सेना
आकाश सक्सेना वह शख्स हैं जिन्होंने न केवल आजम खान बल्कि उनके बेटे और उनकी पत्नी का कैरियर तबाह कर दिया। आकाश सक्सेना की वजह से ही परिवार को जेल की हवा खानी पड़ी और आजम खान अभी तक सलाखों के पीछे हैं। दो पैन कार्ड, दो पासपोर्ट, दो जन्म प्रमाण पत्र समेत कई मामलों में आकाश सक्सेना सीधे-सीधे मुकदमें में वादी हैं तो कई में कोर्ट में आजम और उनके परिवार पर चार्जफ्रेम कराने में मजबूत गवाही दे चुके हैं। जौहर विवि से जमीनें छिनवाने में भी आकाश का ही हाथ रहा है, उन्होंने न सिर्फ शिकायतें कीं बल्कि, राजस्व परिषद तक केस के मुख्य निगरानीकर्ता रहे। पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बड़े बेटे आकाश सक्सेना छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। बाद में कारोबार से जुड़े और फिर उद्योगपतियों के नेता बने। आईआईए के लंबे समय चेयरमैन रहे। बाद में उन्हें भाजपा ने पश्चिमी यूपी के लघु उद्योग प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया।
जातीय समीकरण
Published on:
04 Feb 2022 08:51 pm
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