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UP assembly election 2022: प्रत्याशियों की सूची घोषित होते ही कांग्रेस में घमासान

UP assembly election 2022 के लिए कांग्रेस ने जैसे ही प्रत्याशियों की सूची जारी की, बनारस कांग्रेस में घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर जमकर अपनी भड़ास निकालने में जुट गए हैं। कुछ दावेदारों ने तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपने नाम के साथ जुड़े कांग्रेस को हटा दिया है। तो जानते हैं क्या चल रहा है कांग्रेस के अंदरखाने...

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प्रियंका गांधी वाड्रा

प्रियंका गांधी वाड्रा

वाराणसी. UP assembly election 2022: पिछले तीन दशक से यूपी की सत्ता से बाहर कांग्रेस एक ओर जहां महासचिव पर यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में अपनी जमीन तलाश रही है वहीं आलम ये है कि गुरुवार को जैसे ही छठवें व सातवें चरण के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी हुई पार्टी में घमासान मच गया। कैंट विधानसभा सीट से दावेदार रामनगर पालिका परिषद की चेरयमैन रेखा शर्मा ने समर्थकों संग पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। इधर शहर की दो अन्य सीटें शहर उत्तरी और दक्षिणी तथा शिवपुर व अजगरा के प्रत्याशियों को लेकर भी विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। कांग्रेसी खुल कर फेसबुक सहित सोशल मीडिया के अन्य प्रारूपों पर अपनी भड़ास निकाने में जुट गए हैं।

कांग्रेस में ज्यादा विरोध शहर की तीन विधानसभा सीटों को लेकर हैं जिसमें कैंट, शहर उत्तरी और शहर दक्षिणी विधानसभा सीट को लेकर विरोध है। अव्वल तो खुद कांग्रेसी ही भौंचक हैं इन प्रत्याशियों से। वो खुद ही एक दूसरे से संपर्क कर ये पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं फलां प्रत्याशी है कौन? ऐसे में इनका विरोध इस बात को लेकर है कि जिसे पार्टी के लोग ही नहीं जानते वो महीने भर से भी कम समय में आमजन को कैसे समझा पाएंगे। ऐसे में हर कोई कांग्रेस नेतृत्व को कोस रहा है। कुछ लोग तो ऊपरी स्तर से कांग्रेस-सपा के बीच की अंडर स्टैंडिंग बता रहे हैं तो कुछ बड़े प्रलोभनों की बात कर रहे हैं।

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कुछ ऐसे पुराने कांग्रेसी भी हैं जो प्रत्याशियों की सूची को पोटैशियम साइनाइट बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि पहले से ही आईसीयू में चल रही कांग्रेस का वेंटिलेटर भी हटा लिया गया है। पुराने कांग्रेसी इस सूची को लक्ष्य कर ये भी कहने से गुरेज नहीं रख रहे कि कांग्रेस ने बीजेपी को वाकओवर दे दिया है या इसे होली का गिफ्ट समझा जाए।

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इस बीच पुराने कांग्रेसी, कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय के बेहद करीबी माने जाने वाले शैलेंद्र सिंह ने तो सोशल मीडिया के सभी प्रारूप से अपने नाम के साथ लगे कांग्रेस शब्द को ही हटा दिया है। शैलेंद्र सिंह छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष व कांग्रेस के जुझारू नेता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने गुरुवार दोपहर के बाद शोसल मीडिया के सभी प्रारूप से कांग्रेसी होने का परिचय हटा दिया। शैलेंद्र शहर उत्तरी से टिकट के प्रबल दावेदार रहे। उनका टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में असंतोष है।

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ये वही शैलेंद्र सिंह हैं जिन्होंने आंदोलन के बल पर करियप्पा मार्ग के बदले फोरलेन का निर्माण शुरू हुआ। करियप्पा मार्ग खोलने या विकल्प देने के लिए शैलेंद्र सिंह ने दसों बार प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय का घेराव किया जिसके परिणाम स्वरूप आज फोरलेन का निर्माण हो रहा है। शैलेंद्र सिंह 1997 से लगातार छावनी परिषद के पार्षद हैं।उपाध्यक्ष भी थे पत्नी भी पार्षद रहीं हैं। 2015 में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी व रेल राज्य मंत्री मनोज सिंहा ने शैलेंद्र सिंह के खिलाफ डोर टू डोर प्रचार किया था। बावजूद इसके बीजेपी सहित सभी अन्य प्रत्याशियों की जमानत जब्त है गई थी। अब वहां से एक मुस्लिम महिला को टिकट दिया गया है जिसे कांग्रेसी ही नहीं पहचानते। शैलेंद्र पिछले चुनाव में भी दावेदार थे पर टिकट नहीं मिला था। तब कांग्रेस-सपा गठबंधन के तहत सपा नेता अब्दुल समद को कांग्रेस के टिकट पर लड़ाया गया था। हालांकि जब पत्रिका ने शैलेंद्र से संपर्क किया तो उन्होंने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

उधर शहर दक्षिणी की बात करें तो वहां से पूर्व महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अनिल श्रीवस्तव 'अन्नू' टिकट के प्रबल दावेदार रहे। लेकिन उनका भी टिकट काट दिया गया और यहां से भी एक अनजान महिला प्रत्याशी को टिकट दिया गया है। महिला प्रत्याशी कांग्रेसी नेता गौरव कपूर की पत्नी हैं। इन्हें लेकर शहर दक्षिणी से जुड़े कांग्रेसी बगावती मूड में हैं। यहां तक कि वार्ड कमेटियों तक में नाराजगी साफ झलक रही है।

ऐसे ही शिवपुर विधानसभा सीट को लेकर है। वहां से किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक रामसुधार मिश्र दावेदार रहे। रामसुधार 2017 के विधानसभा चुनाव से ही दावेदारी ठोंक रहे हैं। पिछली बार राहुल गांधी के आह्वान पर सबसे ज्यादा किसान पत्र भी भरवाया था। लेकिन तब कांग्रेस-सपा गठबंधन के तहत ये सीट सपा के खाते में गई और आनंद मोहन गुड्डू को टिकट मिला जो बीजेपी प्रत्याशी अनिल राजभर से हार गए थे। इस बार भी रामसुधार को मायूसी ही हाथ लगी है। उधर सुरक्षित सीट अजगरा के प्रत्याशी को लेकर भी कांग्रेसजनों में जबरदस्त नाराजगी है।

आम कांग्रेसियों का कहना है कि बनारस से जुड़े दो दिग्गज नेताओं ने अपनी-अपनी गोटी फिट करने के चक्कर में कांग्रेस का बंटाधार कर दिया है।