
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : सवायजपुर में खिला है कमल, अब सपा-बसपा ठोंक रहे ताल
हरदोई (पत्रिका न्यूज नेटवर्क). जिले की सवायजपुर विधानसभा सीट ( Sawayajpur assembly seat ) उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शुमार है, जहां के मतदाता बाढ़ की विभीषिका से परेशान रहते हैं। फर्रुखाबाद, कन्नौज और शाहजहांपुर जिलों की सीमाओं को छूने वाले इस विधानसभा क्षेत्र में पांच नदियों का कहर बारिश में सबसे अधिक होता है। चुनावी मिजाज ऐसा है कि यहां पिछले चुनाव में भाजपा जीती थी और अब फिर चुनाव के वक्त पार्टियां वोट मांगने निकल पड़ी हैं। यहां चौथे चरण में 23 फरवरी को मतदान होगा।
हरदोई जिले की सवायजपुर विधानसभा सीट ( Sawayajpur assembly seat ) पर पिछले चुनाव में भाजपा के कुंवर माधवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने सपा के पदमराग सिंह यादव को 26 हजार से अधिक मतों से हराया था। इस चुनाव में कुंवर माधवेंद्र सिंह को 92601 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के पदमराग सिंह को यादव 65631 वोट मिले थे। माधवेंद्र सिंह वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार थे और तीसरे स्थान पर थे। वर्ष 2012 के चुनाव में यहां से बसपा की रजनी तिवारी जीती थीं।
वर्ष 2022 के चुनाव में क्या होगा
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में हरदोई जिले में चौथे चरण में चुनाव होगा। इस सीट ( Sawayajpur assembly seat ) पर 23 फरवरी को मतदान होगा। नए विधायक को चुनने के लिए क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। इस सीट पर भाजपा, बसपा और सपा के उम्मीदवारों के बीच ही टक्कर होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। क्षेत्र में संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क तेज कर दिया है। अपने-अपने समाज और समर्थकों के गांव पहुंचने लगे हैं। चुनावी गोलबंदी भी होने लगी है। पिछड़े वर्ग के मतदाता अधिक होने के कारण सपा-बसपा का प्रभाव नजर आता है। हालांकि अभी तक राजनीतिक दलों ने Uttar Pradesh Assembly Election 2022 के उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।
ये हैं क्षेत्र के मुख्य मुद्दे
विकास के मामले में यह क्षेत्र ( Sawayajpur assembly seat ) काफी पिछड़ा हुआ है। पूरा क्षेत्र बारिश में बाढ़ से घिरा रहता है, क्योंकि इस क्षेत्र में पांच नदियां हैं और ज्यादातर बारिश के वक्त कहर बरपाती हैं। ऐसे में खेती-किसानी चौपट हो जाती है। इसके बाद जैसे-तैसे फसल उगाने वाले किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम न मिलना भी एक बड़ी समस्या है। किसान छुट्टा जानवरों से भी परेशान हैं। इनका कहना है कि मौसम की मार से बची फसल को छुट्टा जानवर नुकसान पहुंचा रहे हैं। रोजगार के लिए एकमात्र चीनी मिल ही सहारा है लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं। क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं का हाल ये है कि पीएचसी में डॉक्टर न के बराबर रहते हैं। कंपाउंडर ही व्यवस्था चला रहे हैं। बड़ी ग्राम पंचायतों को नगर पंचायतों का दर्जा देने की मांग पुरानी है लेकिन सरकारें ध्यान नहीं देती हैं।
Published on:
10 Jan 2022 05:57 pm
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