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UP Assembly Elections 2022: क्या है बुन्देलखण्ड की जनता का मूड? पिछले चुनाव में बीजेपी ने किया था सूपड़ा साफ

दो दशक से लगातार सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के लिए पानी और पलायन सबसे बड़ा मुद्दा है। वीरान हो चुके यहाँ के कई गाँव पलायन की भयावह दास्तान सुनाते हैं। ये इलाका देश का सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला इलाका है। इसी के साथ ही यहां ग़रीबी और बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है।

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UP Assembly Elections 2022: क्या है बुन्देलखण्ड की जनता का मूड?

UP Assembly Elections 2022: क्या है बुन्देलखण्ड की जनता का मूड?

UP Assembly Elections 2022: कभी बसपा का गढ़ मानी जाने वाली बुन्देलखण्ड में 2017 के चुनावों में बीजेपी ने सबका सूपड़ा साफ कर दिया और यहां की 19 की 19 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा लिया। जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को यहाँ मात्र एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा था। उस वर्ष यहाँ की 4 सीटों पर कांग्रेस, 1 पर बीजेपी और 7-7 सीटों पर बसपा और सपा ने जीत दर्ज की थी। बुंदेलखण्ड में कुल सात जिले और 19 विधानसभा सीटें आती हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने बुंदेलखण्ड की इन सभी 19 सीटों पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया था। इतना ही नहीं बीजेपी ने ये सभी सीटें करीब एक लाख से लेकर 15 हजार वोटों के बड़ें अंतर से जीती थीं। ऐसे में इस बार बीजेपी के ऊपर पिछला इतिहास दोहराने का जबर्दस्त दबाव है। वहीं विपक्षी दलों के लिए भी बीजेपी के गढ़ को भेद पाना बेहद आसान नहीं है।

बदला है सियासी समीकरण

बुन्देलखण्ड के चुनावी इतिहास पर गौर करें तो 2022 की राह बीजेपी के लिए इतनी आसान नहीं रहने वाली। वजह ये कि जहां कांग्रेस यहां धीरे-धीरे अपना काफी जनाधार तैयार कर चुकी है। प्रियंका गांधी ने पिछले साल यहाँ जबर्दस्त दौरे किये थे। वहीं अखिलेश यादव ने अपने समाजवादी रथ यात्रा का पहला चरण भी इसी इलाके से शुरू किया था। दूसरी ओर इस बार आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम की मौजूदगी ने भी यहाँ के सियासी समीकरण को बदल दिया है।

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बुंदेलखण्ड के चुनावी मुद्दे

दो दशक से लगातार सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड के लिए पानी और पलायन सबसे बड़ा मुद्दा है। वीरान हो चुके यहाँ के कई गाँव पलायन की भयावह दास्तान सुनाते हैं। ये इलाका देश का सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला इलाका है। इसी के साथ ही यहां ग़रीबी और बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है। यहां के किसान खेती के लिए सिर्फ बारिश के पानी पर ही निर्भर रहते हैं। जिस साल बारिश नहीं उस साल फसल नहीं। वहीं यहां आवारा पशुओं की भी बड़ी समस्या है। सरकारें आती रहीं और जाती रहीं लेकिन बुंदेलखंड जिस समस्या से 20 साल पहले जूझ रहा था वो समस्या यानि पानी की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

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बुंदेलखंड की सीटें

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बुंदेलखंड की आबादी (2011 की जनगणना के अनुसार)