
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : भाजपा ने जीता था सपा का गढ़ मलिहाबाद , इस बार कौन पड़ेगा भारी
समाजवादी पार्टी का गढ़ रही लखनऊ जिले की मलिहाबाद सीट (Malihabad Assembly constituency) में भाजपा ने पहली बार पिछले चुनाव में भगवा फहराया था। सांसद कौशल किशोर की पत्नी जयदेवी ने समाजवादी पार्टी की राजबाला को 22668 मतों के अंतर हराया था। अब Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में इस सुरक्षित सीट पर कब्जा करने के लिए भाजपा-सपा एक बार फिर भिड़ेंगे। आम उत्पादक क्षेत्र होने के कारण इसे मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है।
मलिहाबाद विधानसभा सीट (Malihabad Assembly constituency) पर वर्ष 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जयदेवी ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 94677 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर रहीं राजबाला को 72009 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार सत्य कुमार गौतम का 53481 मत मिले थे। इसके पहले वर्ष 2012 के चुनाव में इस सीट से सपा के इंदल कुमार ने जीत दर्ज की थी। इन्हें 62782 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे आरसीसी के कौशल किशोर को 60587 मत मिले थे। इस चुनाव में बसपा के डॉ. सिद्वार्थ शंकर को 53550 वोट मिले थे जबकि भाजपा के उम्मीदवार राजेश कुमार को महज 3300 वोट मिले थे और छठे नंबर पर थे। यह सीट मोहनलाल गंज संसदीय सीट में आती है और यहां से दूसरी बार भाजपा के कौशल किशोर सांसद हैं, जो मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं और मलिहाबाद की विधायक जयदेवी इनकी पत्नी हैं।
वर्ष 2022 के चुनाव में भिड़ेंगे
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 को लेकर मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र (Malihabad Assembly constituency) में सभी दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश जहां फिर से प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर भगवा फहराने की है, वहीं समाजवादी पार्टी वर्ष 2012 की जीत वाली तस्वीर चाहती है। ऐसे में पूरे क्षेत्र में दोनों दलों की गतिविधियों के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी भी अपने स्तर से मतदाताओं के बीच संपर्क बनाने में जुटी है। कोविड-19 की गाइडलाइन के कारण भीड़भाड़ वाले Uttar Pradesh Assembly Election 2022 प्रचार के तौर-तरीकों पर रोक लगी है। ऐसे में संभावित उम्मीदवार व्यक्तिगत व सोशल मीडिया के जरिए ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।
ये हैं क्षेत्र के मुख्य मुद्दे
उत्तर प्रदेश के प्रमुख आम उत्पादकों में शुमार मलिहाबाद (Malihabad Assembly constituency)में क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या आम उत्पादक कि सानों की है। इन किसानों को आम की फसल के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। दवाइयां काफी महंगी होने के कारण किसानों के लिए दवा छिड़काव काफी मुश्किल हो जाता है। इससे भी बड़ी समस्या मौसम की मार है। अगर मौसम खराब हो गया तो फिर पूरी फसल नष्ट हो जाती है और इसका न तो कहीं से मुआवजा मिलता है और न कोई और मदद। जीविकोपार्जन का साधन भी आम बिक्री से होने वाली आय है। आम उत्पादन क्षेत्र के कारण लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है लेकिन यहां बुनियादी ढांचा कमी से यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। राजधानी से नजदीक होने के कारण विकास तो हो रहा है लेकिन अगर सही ढंग से इसकी प्लानिंग की जाय तो इसकी अपार संभावनाएं हैं।
Published on:
15 Jan 2022 01:41 pm
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