
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 : मिश्रिख में 5 चुनाव जीत चुकी सपा को भाजपा ने किया था परास्त, फिर होगी टक्कर
सीतापुर (पत्रिका न्यूज नेटवर्क). दुनिया के करोड़ों हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार मिश्रिख (Misrikh ) में अब धीरे-धीरे चुनावी सरगर्मी जोर पकडऩे लगी है। क्षेत्र में सर्द हवाओं के बीच सियासत कुछ ऐसी है कि खेती-किसानी से थोड़ा फुर्सत पाए किसान भी चुनावी चर्चा में व्यस्त हैं। इस सुरक्षित सीट पर भाजपा काबिज है, जिसे बसपा ने कड़ी टक्कर दी थी। वर्ष 2012 का चुनाव सपा जीती थी।
वर्ष 2017 के चुनाव में सीतापुर जिले की मिश्रिख सीट (Misrikh Assembly constituency) पर भारतीय जनता पार्टी के राम कृष्ण भार्गव ने 86403 वोट पाकर बहुजन समाज पार्टी के मनीष कुमार रावत को हराया था। रावत को 65731 वोट मिले थे। सपा के रामपाल राजवंशी को 61231 वोट मिले थे। यह उल्लेख करना जरूरी है कि मिश्रिख सीट (Misrikh Assembly constituency) 1952 से लेकर वर्ष 2007 तक सामान्य रही जबकि नए परिसीमन के बाद वर्ष 2012 के चुनाव में सुरक्षित हो गई। राजनीतिक प्रभुत्व के हिसाब से देखें तो यहां 1993 से लेकर 2012 तक के चुनाव में समाजवादी पार्टी की पताका लहराती रही है, लेकिन वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने सपा के इस गढ़ को ध्वस्त करते हुए उसकी जीत पर विराम लगाकर भगवा फहरा दिया।
वर्ष 2022 के चुनाव में
विधानसभा चुनाव की तैयारियां में समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों जुटी हुई हैं। पिछले चुनाव की हार को अभी तक समाजवादी पार्टी पचा नहीं पाई है। Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में सपा वापस पाने के लिए भाजपा की काट ढूंढ रही है जबकि भाजपा खुश है कि उसने सपा के गढ़ को ध्वस्त किया लेकिन अब उसके समक्ष Uttar Pradesh Assembly Election 2022 जीतने की बड़ी चुनौती है। भाजपा के ही एक नेता ने कहा कि चुनाव की तिथियां और उम्मीदवार की घोषणा के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी लेकिन भाजपा इस सीट पर जरूर जीत जरूर दोहराना चाहेगी।
ये हैं क्षेत्र के मुख्य मुद्दे
मिश्रिख (Misrikh Assembly constituency) में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है। पर्यटन की यहां अपार संभावनाएं हैं लेकिन उस दिशा में ठीक प्रकार से काम नहीं हो पा रहा है। यहां के अधिकांश लोग कमाने-खाने के लिए लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं जबकि कुछ आसपास ही मजदूरी करके जीवन यापन कर रहे हैं। बड़ी आबादी खेती पर ही निर्भर है लेकिन जोत कम होने के कारण अधिक उत्पादन नहीं हो पाता है। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार से मिल रही मदद से थोड़ी राहत है। शिक्षा व स्वास्थ्य की भी उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा मुद्दा यहां रोजगार और शिक्षा का है।
Published on:
06 Jan 2022 06:47 pm
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