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UP Assembly Elections 2022 : इस बार आसान नहीं अब्दुल्ला आजम की राह, नवाबजादे से होगी सीधी जंग

UP Assembly Elections 2022 : स्वार टांडा सीट (Suar Tanda Assembly Seat) आजादी के बाद से अब तक नबाब परिवार के काजिम अली खान के कब्जे में रही है। काजिम अली खान ने कई बार राजनीतिक दल बदले, लेकिन उसके बावजूद जनता ने काजिम अली खान पर ही भरोसा जताकर उन्हें हर बार जिताया। इस बार अब्दुल्ला आजम का सीधा मुकाबला नवाबजादे हमजा मियां (Hamza Mian) से है।

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UP Assembly Elections 2022 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के दूसरे चरण में रामपुर की स्वार हॉट सीट पर 14 फरवरी को मतदान होगा। स्वार टांडा सीट (Suar Tanda Assembly Seat) समाजवादी प्रत्याशी अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) की दो डेट ऑफ बर्थ के चलते एक बार फिर से सुर्खियों में है। हालांकि चुनाव आयोग ने इस बार उनके नामांकन पर अपनी मुहर लगा दी है। इस बार स्वार विधानसभा सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है, क्योंकि अब्दुल्ला आजम को नवाब खानदान के नवाबजादे हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां (Hamza Mian) भाजपा समर्थित अपना दल एस के प्रत्याशी के तौर पर सीधे चुनौती दे रहे हैं। बता दें कि आजादी के बाद से स्वार सीट पर नवाब परिवार का दबदबा रहा है। हालांकि 2017 के चुनाव में इस सीट से अब्दुल्ला आजम ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उनकी उम्र को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद विधायकी रद्द कर दी गई थी।

स्वार टांडा सीट के इतिहास की बात करें तो आजादी के बाद से अब तक नबाब परिवार के काजिम अली खान के कब्जे में रही है। नवाब काजिम अली खान ने कई बार राजनीतिक दल बदले, लेकिन उसके बावजूद जनता ने काजिम अली खान पर ही भरोसा जताकर उन्हें हर बार जिताया। हालांकि एक बार पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना ने स्वार सीट से कमल खिलाया था। उसके बाद 2017 में हुए चुनाव में काजिम अली खान को आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने हरा दिया था। इसके बाद राजनीतिक दुश्मन आकाश हनी सक्सेना और काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया। जिसके चलते अब्दुल्ला आजम की विधायकी चली गई। इस मामले में अभी भी सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है।

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स्वार टांडा की आवाम के मुद्दे

बता दें कि स्वार क्षेत्र में 150 से ज्यादा राइस मिल हैं, जिसमें 70 मिल बंद पड़ी हैं। इसके साथ ही लालपुर डेम का अर्धनिर्मित पुल भी बड़ा मुद्दा है। वहीं, क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा भी ज्यादातर पड़ोसी राज्य उत्तराखंड पर निर्भर है। ज्यादातर लोग अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए उत्तराखंड भेजते हैं। यहां स्कूल कॉलेजों की बेहद कमी है। यहां के लोग अक्सर बड़े कॉलेज खोलने की मांग करते हैं, लेकिन आज तक सरकारी कॉलेज नहीं बन सके हैं। इसके साथ ही यहां रोजगार के साधनों की बेहद कमी है। यहां के लोगों को प्रदेश अन्य जिलों या फिर दिल्ली और उत्तराखंड का रुख करना पड़ता है।

मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में रहे जातिगत समीकरण

स्वार सीट पर 55 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता ही निर्णायक भूमिका में हैं। जबकि 45 हिन्दू मतदाता हैं। इसी वजह से हर बार हिंदू प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि इस बार भाजपा ने अपने समर्थित अपना दल एस के प्रत्याशी हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां को चुनाव मैदान में उतारते हुए मुस्लिम दांव खेला है। जिनका सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी प्रत्याशी अब्दुल्ला आजम से होगा। इस बार देखने वाली बात ये होगी कि नवाबजादे हमजा मियां लोगों का दिल जीत पाने में कामयाब होते हैं या फिर अब्दुल्ला आजम अपना कब्जा जमाते हैं।

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बसपा और कांग्रेस भी दौड़ में शामिल

रामपुर जिले में स्वार सीट बेहद अहम है। सपा और अपना दल एस प्रत्याशी के अलावा बसपा और कांग्रेस ने इस बार इस सीट पर हिंदू प्रत्याशियों पर दांव लगाया है। अगर मुस्लिम वोट बंटे तो बसपा या कांग्रेस प्रत्यााशी को फायदा हो सकता है। स्वार विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने शंकर लाल सैनी को चुनाव मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस राजा ठाकुर भरोसा जताया है। बता दें कि राजा ठाकुर पहले भाजपा में थे। भाजपा में रहते हुए उनकी मुख्तार अब्बास नकवी से बिगड़ गई तो वह पार्टी छोड़कर पहले बसपा में चले गए। उसके बाद चुनाव के चलते कांग्रेस में शामिल हो गए।