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यूपी की प्रथम विधान सभा सीट पर ठंड में भी छूट रहे प्रत्याशियों के पसीने

यूपी की बेहट विधानसभा सीट पर इस बार प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है ताे भारतीय जनता पार्टी के सामने अपनी सीट काे बचाने की चुनौती भी है।

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यूपी प्रथम विधान सभा सीट बेहट

सहारनपुर। वैसे तो इस बार सहारनपुर की सभी सातों सीटों चुनाव टक्कर का होने की उम्मीद है लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रथम विधानसभा सीट यानी बेहट विधानसभा सीट ऐसी है जहां इस बार प्रत्याशियों के सर्दी में भी पसीने छूट रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस सीट पर चुनाव का काटे का हो गया है।

यहां भाजपा से नरेश सैनी चुनाव मैदान में हैं। नरेश सैनी हाल ही में बेहट विधानसभा सीट पर विधायक रहे हैं। 2017 में कांग्रेस के चेहरे के साथ उन्होंने इस सीट पर जीत हांसिल की थी। चुनाव से ठीक पहले इमरान मसूद के साथ नरेश सैनी ने कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने अब नरेश सैनी को ही अपना चेहरा उत्तर प्रदेश की प्रथम विधानसभा सीट पर बनाया है। उधर समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर उमर अली खान को चुनाव मैदान में उतारा है। उमर अली खान दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी के दामाद हैं। इसलिए उनकी एक अलग पहचान भी रही है। युवा प्रत्याशी होने के नाते भी वह बेहट विधानसभा सीट पर भाजपा को टक्कर देंगे।

कांग्रेस ने यहां पर आधी आबादी यानी महिला प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। पूनम कांबोज कांग्रेस की ओर से बेहट विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में उतरी हैं। बसपा से रईस मलिक इस सीट से चुनाव मैदान में खड़े हैं। रईस मलिक करोड़पति हैं और उनके पास काफी संपत्ति है। इसी तरह से आम आदमी पार्टी से सुशील कुमार बेहट विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में हैं। यहां पर तीन प्रत्याशी निर्दलीय भी हैं। इनमें अली खान, मोहम्मद इरफान और धर्मपाल सिंह भी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।

प्रत्याशियों के दावे
बेहट विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे भाजपा प्रत्याशी नरेश सैनी का कहना है कि उन्होंने पिछले पांच साल में काफी विकास कराया है। जनता एक बार फिर उन पर भरोसा कर रही है और इस बार वह इस क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का भी निदान कराएंगे।

समाजवादी पार्टी के चेहरे उमर अली खान का कहना है कि इस सीट पर पिछले पांच वर्षों में कोई काम नहीं हुआ। वह युवाओं के लिए काम करेंगे और पेयजल की जो समस्या है उसका समाधान कराएंगे। वन गुर्जरों को भी भूमि दिलाने का काम करेंगे बाकी जो भी समस्याएं हैं क्षेत्रीय उन पर भी काम करेंगे।


बहुजन समाज पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में उतरे बसपा प्रत्याशी रईस मलिक का कहना है कि घाड़ क्षेत्र में समस्याएं ही समस्याएं हैं और वही इन लोगों का दर्द समझ सकते हैं। केवल बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जो घाड़ क्षेत्र का विकास करा सकती है।


बेहट विधानसभा सीट पर ही कांग्रेस प्रत्याशी पूनम कांबोज का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में बेहट विधानसभा क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ। अगर उनको मौका मिलता है तो वह किसान मजदूरों और गरीब लोगों के लिए काम करेंगी और उनकी समस्याओं का समाधान कराने के लिए तत्पर रहेंगे।

बेहट विधानसभा सीट के मतदाताओं पर एक नजर
बेहट विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 69 हजार 877 है। यहां पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 94 हजार 140 है और महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 75 हजार 725 है। यानी यहां पर महिला आबादी बराबर की है और इस सीट पर जो भी विधायक बनेगा जिसके सिर पर भी सेहरा सजेगा उसमें आधी आबादी यानी महिलाओं का भी पूरा सहयोग होगा। यहां पर थर्ड जेंडर कुल 12 है।

मां शाकंभरी सिद्ध पीठ बेहट विधानसभा सीट की पहचान है। मां शाकंभरी सिद्ध पीठ मंदिर तक ब्रिज का निर्माण, अधूरा पड़ा स्पोर्ट्स कॉलेज, बरसाती नदियों में समय समय पर आने वाली बाढ़ से होने वाली दुर्घटनाएं और घाड़ क्षेत्र के लोगों के पास पेयजल की उचित व्यवस्था ना होना और हर वर्ष होने वाले अग्निकांड इस क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं हैं।

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