
लखनऊ. देश में राजशाही भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन राजघरानों की चुनावी राजनीति में दिलचस्पी आज तक बरकरार है। हांलाकि अब सियासी दल इन रजवाड़ों से संबंधो के लेकर बहुत उतावले नज़र नहीं आ रहे। बावजूद इसके इन रजवाड़ों का सियासत के प्रति मोह भंग नहीं हो रहा है। कल हमने “'टूटता तिलिस्म” सीरीज की पहली कड़ी में प्रतापगढ़ जिले की रियासतों की चर्चा की थी। आज हम रायबरेली, अमेठी और गोण्डा की रियासतों के बारे में जानकारी देंगे। तो शुरू करते हैं अमेठी राजघराने से –
अमेठी राजघराना
अमेठी राजघराने के डॉ संजय सिंह और उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह दोनों सियासत से जुड़े हुए हैं। लेकिन संजय सिंह और गरिमा सिंह में छत्तीस का आंकड़ा रहा है। संजय सिंह ने बैडमिंटन की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अमिता मोदी से शादी कर ली। इसके बाद से अमिता सिंह भी सियासत में कूद पड़ीं।
अमेठी का तिलोई राजघराना
यूपी के अमेठी में तिलोई राजघराने का सियासत से गहरा नाता रहा है। इस राजघराने के राजा मयंकेश्वर शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं।
रायबरेली की शिवगढ़ रियासत
शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह का भी सियासत से गहरा नाता रहा है। रायबरेली भले ही कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही हो मगर शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह बीजेपी से जुड़े रहे हैं। वह एमएलसी भी रह चुके हैं।
रायबरेली की अरखा रियासत
रायबरेली की अरखा रियासत के कुंवर अजय पाल सिंह का भी सियासत से गहरा नाता रहा है। उन्होंने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया था।
गोंडा का मनकापुर राजघराना
मनकापुर राज घराने का दबदबा यहां ऐसा है कि अब तक के चुनावी इतिहास में गोंडा और बलरामपुर लोक सभा क्षेत्र के दर्जनों विधान सभा क्षेत्रों में जिस प्रत्याशी को मनकापुर राजघराने का आशीर्वाद मिला वो हर बार जीता।
गोंडा का परसपुर राजघराना
गोंडा के परसपुर राजघराने में दो राजा हैं। योगेश प्रताप सिंह और अजय प्रताप सिंह। ये दोनों ही अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं। योगेश प्रताप सिंह तो सपा सरकार में मंत्री भी रह चुुके हैं।
गोंडा के बरगदीकोट राजघराना
बरगदीकोट राजघराने के कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया करनलगंज सीट से पांच बार से विधायक रहे हैं। हालांकि 2007 में उनकी छोड़ी सीट से बहन कुंवरी बृज सिंह ने जीत हासिल की थी।
Published on:
21 Dec 2021 06:58 pm
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