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Assembly Elections 2022: अब तक के विधानसभा चुनावों में सामने आया दिलचस्प ट्रेंड, इस बार महिलाएं बदलेंगी सियासी तस्वीर?

चुनाव आयोग के मुताबिक गोवा विधानसभा चुनावों में महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। जब भी महिला वोटर्स की संख्या में वृद्धि हुई है तब तब सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। ऐसे में क्या इस बार महिला वॉटर्स की संख्या में वृद्धि का ट्रेंड क्या सियासी समीकरण बदलेगा?

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women power in UP, Punjab, Goa and Uttarakhand assembly elections

women power in UP, Punjab, Goa and Uttarakhand assembly elections

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं का प्रदर्शन इस बार काफी शानदार दिखाई दे रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार पुरुषों से अधिक महिलाओं ने उत्तराखंड और गोवा में वोट डालें हैं। वहीं, पहले चरण में मणिपुर और दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश में महिलाओं ने अधिक वोट डाले हैं। पंजाब की बात करें तो महिलाओं और पुरुषों का वोट प्रतिशत लगभग बराबर है। हालांकि, यूपी में अभी सातवें चरण का मतदान होना बाकी है। इन चुनावों महिला वॉटर्स की अधिक संख्या का ट्रेंड किसे फायदा पहुंचाएगा ये बड़ा सवाल है। गौर करें तो जब भी महिला मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है सत्ता में परिवर्तन देखने को मिला है। इससे ये भी स्पष्ट है कि महिलायें पहले की तुलना में अधिक जागरूक हैं।

ट्रेंड में महिलायें रहीं आगे

उत्तर प्रदेश :
यहाँ 20 फरवरी के बाद से या कहे चौथे चरण के बाद से महिलाओं के वोट प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई। छठे चरण में यूपी में 62.62% महिलाओं ने वोट डेल जबकि केवल 51.03% पुरुषों ने ही वोट डाला है। पांचवें चरण में पुरुषों पर महिला मतदाताओं की बढ़त 0.01% अंक से बढ़कर 3.89% हो गई। छठे चरण में ये अंक बढ़कर 11.59% हो गया। यदि वर्ष 2017 से इस बार के चुनावों में डेल गए वोट की तुलना करें ये पिछली बार की तुलना में थोड़ा कम रहा।

उत्‍तराखंड: यहाँ 62.6% पुरुषों ने वोट डाले जबकि 67.2% महिलाओं ने वोट डाले।

गोवा: यहाँ भी पुरुषों से ज्‍यादा महिला वोटर्स बूथ तक पहुंची। महिला वॉटर्स की संख्या 5,93,860 है, जबकि पुरुषों की 5,62,500 है। पिछली बार भी महिलाओं ने पुरुषों से अधिक वोट डाले थे।
चुनाव आयोग के मुताबिक गोवा विधान सभा में महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा है. यानी गोवा में सत्ता बदलने के लिए महिलाओं के पास काफी ताकत है.
मणिपुर: यहाँ करीब 90 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला है जबकि वर्ष 2017 में 88 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला था।

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महिला वॉटर्स का ये ट्रेंड सत्ता परिवर्तन के संकेत?

जब भी किसी राज्य में विधानसभा चुनावों में महिलाओं के वोट की संख्या बढ़ी है, सत्ता में परिवर्तन देखने को मिला है। एक केस तो ये भी है कि केरल जैसे राज्यों में महिला वॉटर्स की बढ़ती संख्या ने फिर से पिनाराई विजयन को सत्ता में बैठाया। पश्चिम बंगाल में भी यही देखने को मिला जहां ममता बनर्जी को महिला वॉटर्स का खूब साथ मिला।

बिहार में जब नीतीश कुमार को महिला वॉटर्स का मिला सपोर्ट

इसके अलावा गौर करें तो तमिलनाडु में MGR और आंध्र प्रदेश में NTR की सियासी ताकत के पीछे भी महिला वॉटर्स का ही हाथ था। पिछले एक दशक में, उत्तर भारत के बिहार जैसे राज्य में भी महिला वॉटर्स सामने आई हैं। कहा जाता है कि इन महिला वॉटर्स के दम पर ही 2010 में बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार को जीत मिली थी। ।

महिला वॉटर्स ने जब यूपी में भाजपा की जीत में निभाई भूमिका
उत्तर प्रदेश में भाजपा को वर्ष 2017 में मिली जीत दिलाने में भी महिला वॉटर्स ने साथ दिया था। तब 63.31 फीसदी महिलाओं ने जबकि 59.15 फीसदी पुरुषों ने वोट डाला था।

अखिलेश यादव को भी मिली थी सत्ता

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में ज्यादा था और तब अखिलेश यादव को सत्ता मिली थी। तब 60.28 फीसदी महिलाओं ने तो 58.68 पुरुषों ने वोट डाला था।

बता दें कि 7 मार्च को यूपी विधानसभा चुनावों के लिए 7 वें चरण का मतदान होना है। 10 मार्च को पांचों राज्यों में मतगणना होगी।

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