World's First Self Balancing Electric Scooter: क्या आपने कभी ऐसे स्कूटर के बारे में सोचा है जो सेल्फ बैलेंसिंग हो और धक्का लगने के बाद भी न गिरे? पहले ऐसा संभव नहीं था, पर जल्द ही ऐसा संभव होने वाला है। भारत में जल्द ही दुनिया का पहला सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च होने वाला है।
टू-व्हीलर्स को भारत ही नहीं, दुनियाभर में डेली कम्यूट का सबसे सुविधाजनक साधन माना जाता है। कार से सस्ते आने वाले टू-व्हीलर्स डेली राइड के लिए काफी सुविधाजनक होते हैं। हालांकि इनमें एक समस्या ऐसी होती है जो कार में नहीं होती। और वो है बैलेंस की समस्या। टू-व्हीलर्स में बैलेंस बनाए रखना। ज़रा सा भी धक्का लगने पर टू-व्हीलर्स गिर सकते हैं। इनमें कार की तरह सेल्फ बैलेंस नहीं होता। पर अब इस परेशानी का समाधान भी मिल गया है। दो आईआईटी (IIT) ग्रेजुएट्स के शुरू किए गए मुंबई (Mumbai) बेस्ड एक स्टार्टअप लाइगर मोबिलिटी (Liger Mobility) द्वारा दुनिया के पहले सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर (Self Balancing Electric Scooter) को भारत में लॉन्च किया जाने वाला है।
कब होगा लॉन्च?
लाइगर मोबिलिटी का सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर, जो इस तरह का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर होगा, भारत में होने वाले ऑटो एक्सपो (Auto Expo) 2023 में लॉन्च होगा। ऑटो एक्सपो 2023 कल यानि की 11 जनवरी से शुरू हो रहा है और 18 जनवरी तक चलेगा। इस बार का ऑटो एक्सपो नोएडा (Noida) के साथ ही नई दिल्ली (New Delhi) में भी होगा। पहले दो दिन यानि की 11 और 12 जनवरी मीडिया के लिए होंगे। 13-18 जनवरी बिज़नेस के लिए ओपन रहेंगे।
क्या है इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में खास?
लाइगर मोबिलिटी का यह इलेक्ट्रिक स्कूटर सेल्फ बैलेंसिंग तकनीक पर आधारित पहला स्कूटर होगा। न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया में। सेल्फ बैलेंसिंग तकनीक होने से यह इलेक्ट्रिक स्कूटर धक्का लगने या झटका लगने से भी नहीं गिरेगा और इस पर बैठकर दोनों पैर ज़मीन पर टिकाए बिना भी इसे बैलेंस किया जा सकेगा। नीचे दिए गए यूट्यूब (Youtube) वीडियो में सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर का पिछला प्रोटोटाइप दिखाया गया है।
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कंपनी के फाउंडर्स ने दी जानकारी
आईआईटी ग्रेजुएट्स और लाइगर मोबिलिटी के फाउंडर्स आशुतोष उपाध्याय और विकास पोद्दार ने इस सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वो लोग अपने स्टार्टअप के साथ सेल्फ बैलेंसिंग तकनीक पर लम्बे समय से काम कर रहे हैं। दोनों ने बताया कि इस तकनीक को डेवलप रोड एक्सीडेंट्स को कम करने के लिए किया गया है। अक्सर ही टू-व्हीलर्स का बैलेंस बिगड़ने से एक्सीडेंट हो जाता है। ऐसे में सेल्फ बैलेंसिंग तकनीक से इस रिस्क से छुटकारा मिलेगा।
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