
Pension
राज्य के जिन 1200 लोगों ने विश्वविद्यालयों के जरिए 30-35 वर्षों तक सरकार को सेवाएं दीं, वे आज पेंशन के लिए तरस रहे हैं। ये पेंशनर स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर व इससे विभाजित जोबनेर, कोटा व जोधपुर कृषि विश्वविद्यालयों के हैं, जिन्हें 4 साल से नियमित पेंशन का इंतजार है। कोर्ट आदेश पर कुछ महीनों की पेंशन दी जाती है लेकिन अभी 2 साल से पेंशन बकाया चल रही है। इस बीच 121 पेंशनर तो दुनिया से चले गए मगर पेंशन का भुगतान नहीं हुआ।
बीकानेर में वर्ष 1987 में कृषि विवि बनाया गया लेकिन वहां 10-15 साल पहले से ही कृषि संस्थान में कर्मचारी काम कर रहे थे। विवि को विभाजित कर वर्ष 2014 में जोबनेर, जयपुर, कोटा व जोधपुर में भी कृषि विवि शुरू कर दिए गए। इनमें बीकानेर से कर्मचारी भी शिफ्ट किए गए लेकिन वेतन व पेंशन लाभ को बीकानेर विवि से ही जोड़े रखा गया। धीरे-धीरे 1200 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। इस बीच बीकानेर विवि की आमदनी कम होती गई और पेंशन परिलाभ की राशि बढ़ती गई। वर्ष 2014 से तो पेंशन मिलनी लगभग बंद ही हो गई।
-भुगतान रोककर पेंशनरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। यह गलत है। विवि के पास फंड से ज्यादा इच्छाशक्ति की कमी है। श्रवणलाल शर्मा, सदस्य, हाइपावर कमेटी, कृ षि विवि बीकानेर
-विवि में फंड नहीं है। सरकार को पत्र भेजा तो वहां से भी 6 करोड़ रुपए ही आए। विवि में उपलब्ध राशि वर्तमान कर्मचारियों के यूपीएफ की है। अनुदान के लिए सरकार को वापस पत्र भेजा है। बीआर छीपा, कुलपति, कृषि विवि बीकानेर
Updated on:
25 Sept 2018 11:58 am
Published on:
25 Sept 2018 11:58 am
