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मूवी रिव्यू: पिता-पुत्र के रिश्ते में गे की कीमत ‘डियर डैड’

बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी निर्देशन के मार्ग में अपनी किस्मत आजमाने के लिए नए निर्देशक तनुज भ्रमर ऑडियंस को रिझाने के लिए ड्रामे से लबरेज कहानी लेकर आए हैं।

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kamlesh sharma

May 12, 2016

Dear Dad movie

Dear Dad movie

बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी निर्देशन के मार्ग में अपनी किस्मत आजमाने के लिए नए निर्देशक तनुज भ्रमर ऑडियंस को रिझाने के लिए ड्रामे से लबरेज कहानी लेकर आए हैं। साथ ही उन्हें भरोसा है कि उनकी इस फिल्म को दर्शक पसंद करेंगे और उनके काम की भी सराहना करेंगे।

कहानी

90:24 मिनट की पूरी कहानी एक फैमिली के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आती है। नितिन स्वामिनाथन (अरविंद स्वामी) अपनी खुशहाल फैमिली के साथ दिल्ली में रह रहे होते हैं। उनके परिवार में बेटा शिवम और बेटी विधि व पत्नी होती हैं।

बेटा शिवम देहरादून के कॉलेज में हॉस्टलर होता है और वहीं से स्टडी कर रहा होता है और अपनी छुट्टियों के समय वह दिल्ली आता है। अब शिवम की छुट्टियां खत्म होने वाली होती हैं तो उसके पापा नितिन उसे वाया रोड उसे भेजने के लिए मन बनाते हैं और इसके लिए वह मान भी जाता है।

रास्ते में वह अपनी गाड़ी में अकेले ही होते हैं और बेटा शिवम वीडियो गेम में ही बिजी रहता है। इसी दौरान एक नितिन नाश्ता-पानी के लिए एक ढाबे पर रुकते हैं। तभी शिवम की नजर एक रियलिटी शो विनर आदित्य तनेजा पर पड़ती है और वह उसका ऑटोग्राफ लेता है। बस, वहीं से शिवम की दोस्ती आदित्य से हो जाती है।

फिर शिवम अपने पापा से कहता है कि वे आदित्य को भी साथ ही ले चलें, रास्ता पास हो जाएगा। लेकिन नितिन नहीं मानता है, क्योंकि उसे शिवम से कुछ ऐसा बताना होता है, जिसे शायद वह बर्दाश्त भी न कर सके। इस पर शिवम नाराज हो जाता है तो उसके पापा रास्ते में ही अपने माता-पिता के घर ले जाते हैं।

वहां पर जाते ही शिवम अपनी दादी से घुल-मिल जाता है, लेकिन शिवम अपने पापा को दादाजी से कुछ कहते हुए सुन लेता है। फिर पता चलता है कि उसके पापा गे हैं और आगे चलकर वे उसकी मम्मी को भी डिवोर्स देने वाले हैं। इसी तरह से गजब ट्विस्ट के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

अभिनय :

फिल्म 'रोज़ा' स्टारर अरविंद स्वामी ने इस फिल्म में अभिनय की गजब पारी खेली है। वे अभिनय की तह तक जाते से नजर आए। हिमांशु शर्मा भी स्वामी का भरपूर साथ देते दिखाई दिए। इकावली खन्ना ने भी अभिनय में अपना शत-प्रतिशत दिया है। इसके अलावा अमन उप्पल और भाविका भसीन भी फिल्म में अपनी उपस्थित दर्ज कराने में सफल रहे।

निर्देशन :

इंडस्ट्री के नवनिर्देशक तनुज भ्रमर ने ऑडियंस को लुभाने के लिए अपने निर्देशन में हर तरह के संभव प्रयास किए हैं। साथ ही उन्होंने फिल्म में ड्रामे का बेहतरीन तड़का लगाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी, फिर भी तनुज अपने निर्देशन में कहीं-कहीं असफल से दिखाई दिए। उन्होंने इस फिल्म में ऑडियंस के लिए काफी मसाला दिया है, जिसके कारण वे ऑडियंस की कुछ हद तक वाहवाही लूटने में सफल रहे।

फिल्म का फस्र्ट हाफ तो जैसे-तैसे दर्शक झेलते दिखाई दिए, लेकिन सेकेंड हॉफ ने थोड़ी स्पीड पकड़ ली। इसके अलावा भले ही इस फिल्म की स्क्रिप्ट थोड़ी डगमगाती सी नजर आई, लेकिन इसकी कहानी ऑडियंस को लास्ट तक बांधे रखने में कुछ हद तक सफल भी रही।

बहरहाल, 'यहां तो सब माउंटेन व्यू ही होता है, हिल स्टेशन जो है... जैसे एक-आद डायलॉग्स की तारीफ की जा सकती है, लेकिन अगर सिनेमेटोग्राफी और टेक्नोलॉजी अंदाज को छोड़ दिया जाए तो कॉमर्शियल तौर पर कुछ खास करने में असफल रही। संगीत (राघव-अर्जुन, उज्जवल कश्यप) ने कई मायनों में अपनी ठीक-ठाक भूमिका निभाई।

बैनर : पिपरमिंट स्टूडियोज

निर्माता : रत्नाकर एम. और शान व्यास

निर्देशक : तनुज भ्रमर

जोनर : ड्रामा

संगीत : राघव-अर्जुन, उज्जवल कश्यप

छायांकन : मुकेश जी

स्टारकास्ट : अरविंद स्वामी, हिमांशु शर्मा, इकावली खन्ना, अमन उप्पल, भाविका भसीन

रेटिंग : डेढ़ स्टार