
Dhruv Rathee Lashes On Raghav Chadha (सोर्स- एक्स)
Dhruv Rathee Lashes On Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के सासंद राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी को छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है। राघव ने शुक्रवार को एलान किया कि वो ना ही सिर्फ आप से इस्तीफा दे रहे हैं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कमल को भी अपना रहे हैं। इसी के बाद से ही नेताओं और कई हस्तियों के रिएक्शन्स देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल हैं जिन्होंने राघव चड्ढा पर जमकर हमला बोला है। ध्रुव राठी ने क्या कुछ कहा है, चलिए जानते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ध्रुव राठी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में ध्रुव राठी ने राघव की नीयत पर कई सवाल उठा दिए। ध्रुव ने कहा कि राघव जो आजतक बीजेपी को गुंडों की पार्टी कहते थे, आज खुद ही चंद पैसों के लिए बिक गए हैं।
ध्रुव राठी ने कहा, राघव चड्ढा जितना बड़ा धोखेबाज इंसान मैंने शायद ही आज तक देखा हो। मतलब राजनेता पार्टियां बदलते रहते हैं इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन जितना नाटक इस बंदे ने किया था सोशल मीडिया पर जाकर जनता के आम मुद्दे उठाने का और इतने लोगों को बेवकूफ बनाने का, इस पर यकीन ही किया जा सकता। इसके बाद ध्रुव कहते हैं कि जो सिद्धांत अब राघव को आप में नहीं दिखते वो अचानक से बीजेपी में कैसे आ गए।
आगे बात करते हुए ध्रुव ने कहा, 'क्योंकि कुछ महीने पहले तक तो खुद कह रहे थे कि बीजेपी गुंडों की पार्टी है। इतना ही नहीं, कुछ टाइम पहले तक तो ये भी कह रहे थे कि मुझे तो कोई खरीद ही नहीं सकता। मतलब राघव झूठ बोलने की भी हद होती है। आप स्वीकार कर लो कि एक नंबर के कायर हो आप। आपको कोई जेल में ना डालते तो आपने अपना पाला ही बदल लिया है।' ध्रुव ने कहा ऐसा करके राघव ने पूरी इज्जत गवा दी है।
बता दें शुक्रवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसदों का एक समूह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय करने जा रहा है। चड्ढा का दावा है कि उनके साथ पार्टी के सात सांसद हैं जो कि राज्यसभा में 'आप' की कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई हिस्सा है। इस घोषणा के बाद वो संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ बीजेपी मुख्यालय पहुंचे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की।
बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक स्वागत के बावजूद, इन सांसदों की आधिकारिक ज्वाइनिंग अभी रुकी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया है। राज्यसभा सदस्य होने के नाते, ये सांसद सीधे किसी दूसरी पार्टी की सदस्यता नहीं ले सकते। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत, उन्हें पहले राज्यसभा के सभापति के समक्ष अपना पक्ष रखना होता है। जब तक सभापति इस विलय को विधिवत स्वीकार नहीं कर लेते और रिकॉर्ड में बदलाव नहीं होता, तब तक ये सांसद तकनीकी रूप से बीजेपी का हिस्सा नहीं माने जाएंगे।
Updated on:
25 Apr 2026 02:30 am
Published on:
25 Apr 2026 06:30 am
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