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“8 महीने तक दाने-दाने को तरसा ‘सलाम बॉम्बे’ का स्टार शफीक सैयद!” प्रोड्यूसर्स के पैरों में गिरकर भी नहीं मिला काम

Child Actor Shafiq Sayed: सलाम बॉम्बे के स्टार शफीक सैयद ने 8 महीने तक भूख और मुश्किल हालात का सामना किया। दाने-दाने को तरसते हुए उन्होंने काम की तलाश में प्रोड्यूसर्स के पास मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन कुछ भी हाथ न लगा।
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'सलाम बॉम्बे' का स्टार शफीक सैयद

'सलाम बॉम्बे' का स्टार शफीक सैयद (IMDb/X :@saltbylutyens)

Child Actor Shafiq Sayed: फिल्मी दुनिया में अक्सर ये माना जाता है कि एक बड़ी फिल्म या अवॉर्ड किसी स्टार के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा देता है, लेकिन एक्टर शफीक सैयद की कहानी इस सोच से बिल्कुल अलग है। बता दें, मीरा नायर की फेमस फिल्म 'सलाम बॉम्बे' से पहचान बनाने वाले शफीक ने न सिर्फ नेशनल लेवल पर सम्मान हासिल किया, बल्कि जिस फिल्म में उन्होंने काम किया, वो ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट हुई। इसके बावजूद उनका एक्टिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया।

शफीक सैयद के बचपन के दिन

शफीक सैयद का बचपन बेहद संघर्षों में बीता। बेहतर जिंदगी की तलाश में वो कम उम्र में बेंगलुरु से मुंबई पहुंच गए थे। चर्चगेट इलाके में सड़कों पर रहने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्ममेकर मीरा नायर की टीम से हुई। एक एक्टिंग वर्कशॉप के जरिए उन्हें 'सलाम बॉम्बे' में लीड रोल निभाने का मौका मिला। फिल्म ने दुनियाभर में सराहना बटोरी और शफीक को भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही, फिल्म की कामयाबी के बाद उन्हें उम्मीद थी कि बॉलीवुड में उनके लिए नए अवसर खुलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई महीनों तक उन्होंने फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाए और अपने बारे में छपी अखबारों की कटिंग्स दिखाकर काम मांगते रहे। हालांकि, उन्हें कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कई बार लोग उनकी उपलब्धियों से ज्यादा ये पूछते थे कि उन्होंने खाना खाया है या नहीं।

'सलाम बॉम्बे' उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी

बता दें, काम नहीं मिलने के कारण आखिरकार शफीक ने मुंबई छोड़ने का फैसला किया और अपने गृह नगर बेंगलुरु लौट आए। यहां उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया था कि उस समय उनकी प्राथमिकता एक्टिंग नहीं, बल्कि परिवार का गुजारा करना था।

शफीक ने अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा था कि 'सलाम बॉम्बे' उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि उनकी अपनी जिंदगी का आईना थी। फिल्म में दिखाए गए हालात वही थे जिन्हें वो खुद जी चुके थे। उन्होंने ये भी कहा कि फिल्म के सेट पर उन्होंने एक्टिंग की बारीकियां सीखी थीं, लेकिन कामयाबी के बावजूद उन्हें इंडस्ट्री में लगातार काम नहीं मिला। बता दें, शफीक सैयद की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट और उपलब्धियां हमेशा लंबे करियर की गारंटी नहीं होतीं। कई स्टार्स को पहचान मिलने के बाद भी संघर्ष का सामना करना पड़ता है और जिंदगी आगे बढ़ाने के लिए नए रास्ते चुनने पड़ते हैं।

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