
एटा। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ प्रदेश के अधिकारी व कर्मचारियों को रिश्वत न लेने को लेकर चाहे ईमानदारी का कितना ही पाठ क्यों न पढ़ायें लेकिन ये एटा के कलेक्ट्रेट के बाबू सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। यहां कलेक्ट्रेट में धड़ल्ले से ठेकेदारों से रिश्वत ली जा रही है। ठेकेदारों से हैसियत,चरित्र प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर खुले आम रिश्वत लेने का मामला सामने आया है।
एटा के जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट में डीएम और एडीएम की नाक के नीचे रिश्वत का बड़ा खेल, चल रहा है। बाबू ठेकेदारों के हैसियत प्रमाण पत्र व चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर 10 हजार से 20 हजार रुपए प्रति ठेकेदार से ले रहे हैं। प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर चल रही है खुलेआम अवैध वसूली पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौन बने हुए हैं। वहीं पीड़ित ठेकेदारों का आरोप है कि जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों की मिली भगत से रिश्वत का यह खेल चल रहा है। रिश्वतखोरी का खेल, शराब की दुकानों को लेकर बन रहे थे ये प्रमाणपत्र।
दरअसल सरकार के दिशा निर्देश पर आबकारी विभाग ने नीति बदली है, नई नीति के बाद कलेक्ट्रेट, तहसीलों और एटा एडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की तो जैसे मौज ही आ गई हो है। रिश्वतखोर कलेक्ट्रेट के बाबू जो चाहे जैसे चाहे मनमर्जी रुपया लेकर हैसियत व चरित्र प्रमाणपत्र बनाते हैं। अगर ठेकेदारों द्वारा मनमर्जी का पैसा दे दिया तो ही फाइल आगे बढ़ पाएगी नहीं तो डाक जाने पर कई कागजों को फाइल से गायब करवा दिया जाता है, ताकि रिश्वत के रुपए दे दें। मोटी रकम देते ही फाइल ओके हो जाती है। रिश्वतखोरी का यह खुला खेल कैमरे में कैद हो गया। कलेक्टेरट में एडीएम की स्टेनो खुलेआम रिश्वत ले रहा है। इस मामले में जब आला अधिकारियों से जवाब चाहा तो सबने चुप्पी साध ली। अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं भूपेंद्र नाम के ठेकेदार ने खुलकर रिश्वत लेने का आरोप लगया है।
Published on:
28 Feb 2018 03:22 pm
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