दरअसल सरकार के दिशा निर्देश पर आबकारी विभाग ने नीति बदली है, नई नीति के बाद कलेक्ट्रेट, तहसीलों और एटा एडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की तो जैसे मौज ही आ गई हो है। रिश्वतखोर कलेक्ट्रेट के बाबू जो चाहे जैसे चाहे मनमर्जी रुपया लेकर हैसियत व चरित्र प्रमाणपत्र बनाते हैं। अगर ठेकेदारों द्वारा मनमर्जी का पैसा दे दिया तो ही फाइल आगे बढ़ पाएगी नहीं तो डाक जाने पर कई कागजों को फाइल से गायब करवा दिया जाता है, ताकि रिश्वत के रुपए दे दें। मोटी रकम देते ही फाइल ओके हो जाती है। रिश्वतखोरी का यह खुला खेल कैमरे में कैद हो गया। कलेक्टेरट में एडीएम की स्टेनो खुलेआम रिश्वत ले रहा है। इस मामले में जब आला अधिकारियों से जवाब चाहा तो सबने चुप्पी साध ली। अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं भूपेंद्र नाम के ठेकेदार ने खुलकर रिश्वत लेने का आरोप लगया है।