
वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम, भूत के डर से मकान छोड़ दें
इटावा. इटावा महोत्सव में कौमी एकता पर आधारित अखिल भारतीय मुशायरे का सफलता पूर्वक आयोजन किया गया। मुशायरे का शुभारम्भ सदर विधायक सरिता भदौरिया, जिलाधिकारी जेबी सिंह, एसडीएम सदर सिद्धार्थ व चेयरमैन नगर पालिका परिषद नोशाबा खानम ने मंच पर शमा रोशन कर किया।
मंच पर चेयरमैन नगर पालिका परिषद नोशबा खानम ने मुख्य अतिथि विधायक सरिता भदौरिया, मुशायरा संयोजक/पूर्व चेयरमैन फुरकान अहमद ने डीएम जेबी सिंह, न्यायाधीश कमरुज्जमा का शाल उढ़ाकर स्वागत किया। मुशायरे में आमिर हुसैन ने बेदम शाह वारसी, इमरान इटावी ने निसार सीमावी की गजल पेश की। मुशायरे की अध्यक्षता करते हुए शायर डॉ. राहत इंदौरी ने कहा मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना। ताज मछली ने सफाई का पहन रखा है, गन्दगी है जो समन्दर से नहीं जाती। संचालन कर रहे हिलाल बदायूंनी ने कहा हिन्दू यहां के हैं मुसलमान यहीं के हैं, ये दोनों यहीं के हैं दोनों यहीं रहेंगे। जौहर कानपुरी ने कहा अपने देश के लोगों का ये नारा है वो कानून बनाओ जिससे प्यार बढ़े। हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई एक हुए नफरत करने वालों की अब खैर नहीं।
शायरा अंजुम रहबर ने कहा हमसे फिर प्यार का इजहार किया है तूने, यह तमाशा तो कई बार किया है तूने। मकनपुर से आये शायर काशिफ अदीब ने कहा तुम भी मुझको ऐसा वैसा समझेगा होश में आओ अपने जैसा समझेगा, उनके लबों पर मेरा चर्चा समझेगा कैसे वही ये उलटी गंगा समझेगा।
अली बाराबंकी ने कहा कि करो तुम लाख लागू शहरियत तरमीमी बिल, यह है कानून काला इसको हम बिलकुल नहीं मानेंगे। फतेहपुर से आईं शायरा गुलेसबा ने कहा बीज नफरत के किसी को न बोने देंगे, हिंदु मुस्लिम में अदावत न होने देंगे। हास्य शायर सुंदर मालेगांव महाराष्ट्र ने कहा बुझी बुझी है तबियत मेरी हिरन कर दे, तू आजा पास मेरे गुदगुदी कर दे। झांसी से आये शायर सरवर कमाल ने कहा हमने भी तो खून की किश्तें चुकाई ऐ वतन, अब हमारे नाम का एलान होना चाहिए।
मुम्बई से आये गजलकार महशर आफरीदी ने कहा वो चाहते हैं हिंदुस्तान छोड़ दें हम, बताओ भूत के डर से मकान छोड़ दें हम। मंजर भोपाली ने कहा हर एक चेहरे को सच्चाई मत समझ लेना, यहां पर रोज मुखोटे लगाये जाते हैं।
हाशिम फीरोजाबादी ने कहा मन्दिर मस्जिद पर तो चर्चा की है सौ सौ बार, अर्थ व्यवस्था पर भी चर्चा कर लीजिये सरकार। हसन काजमी लखनऊ ने कहा शमा चौखट पर जलती रही कतरा कतरा पिघलती रही, चांद आंगन में उतरा नहीं मुंतजिर रात ढलती रही। शायरा शबीना अदीब ने कहा तुम्हारे हर सितम पर मुस्कुराना हमको आता है, लगाओ आग पानी में बुझाना हमको आता है।
Published on:
21 Dec 2019 11:24 am
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