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कभी मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा गार्ड रहे इस बहुत बड़े नेता को भाजपा ने दिया इस सीट से लोकसभा का टिकट

भाजपा ने होली के दिन यूपी से लोकसभा चुनाव के लिए 28 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें कई मौजूदा सांसदों के टिकट भी कटे हैं।

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दिनेश शाक्य.
इटावा. भाजपा ने होली के दिन यूपी से लोकसभा चुनाव के लिए 28 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें कई मौजूदा सांसदों के टिकट भी कटे हैं। इन्हीं में से एक हैं डा. रामशंकर कठेरिया। 2009 से ताजनगरी में लोकसभा सीट पर डा. रामशंकर कठेरिया ने ही भारतीय जनता पार्टी का झंडा बुलंद कर रखा था, लेकिन उनका टिकट कटते ही कठेरिया समर्थकों मे मायूसी छा गई है। आरएसएस की मुख्य धारा से जुड़े कठेरिया को एक बार फिर से टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन हाईकमान ने ऐसा नही किया। कठेरिया की जगह भाजपा ने प्रो.एस.पी.सिंह बघेल को संसदीय चुनाव में उतारा है। आगरा आरक्षित संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवार प्रो.एस.पी.सिंह बघेल समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा गार्ड भी रहे हैं। वो फिलहाल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में पशुधन मंत्री के तौर पर काबिज है।

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मुलायम ने पहली बार उन्हें लड़ाया था 1998 में चुनाव-

मुलायम सिंह यादव ने उनकी राजनैतिक क्षमता को देखते हुए 1998 में पहली बार ससंदीय चुनाव में उतारा था। पहली पारी में ही मिली जीत का उन्हें ऐसा चस्खा लगा कि उसके बाद बघेल ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा, लेकिन बाद में उनकी मुलायम से अनबन हो गई।

बघेल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के भटपुरा में के रहने वाले हैं। सत्यपाल सिंह बघेल राजनीति में एस.पी.सिंह बघेल के नाम से लोकप्रिय है। उनकी इकलौती बहन पदमा बताती हैं कि उनके पिता रामभरोसे सिंह मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में तैनात थे। इसी वजह से हम सभी भाई बहनों की पैदाइश मध्यप्रदेश में ही हुई है। सत्यपाल सबसे छोटा है। इसकी पैदाइश मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित यशवंतराव होल्कर अस्पताल में हुई है। पिता रामभरोसे खरगौन से रिटार्यड हुए हैं, इसलिए प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा सभी मध्यप्रदेश में ही हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती होने के बाद सत्यपाल को पहली अहम जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का सुरक्षागार्ड बनने की मिली।

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मुलायम के सीएम बनते ही बघेल शामिल हुए सुरक्षा चक्र में-

1989 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद बघेल मुलायम सिंह यादव के सुरक्षा चक्र में शामिल हो गये, लेकिन अपनी निर्भकता, मेहनत और ईमानदारी के बल पर उन्होंने मुलायम सिंह यादव का भी दिल जीत लिया। सुरक्षा के साथ साथ वो अपने शैक्षिक स्तर को भी उंचा करने मे जुटे रहे। इसी बीच 1993 में वो आगरा कॉलेज में सैन्य विभाग के प्रोफेसर के तौर पर तैनात हो गये, लेकिन उनके मन मे राजनैतिक गुण हिलौरे मार रहे थे। मुलायम सिंह यादव ने उनको जलेसर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर 1998 में पहली बार उतारा, जिसपर उन्होंने जीत हासिल की। उसके बाद दो दफा - 1999 और 2004 में- वो फिर से सांसद चुने गये। उनके बहनोई पूर्व विधायक इंद्रपाल सिंह का कहना है कि बघेल शुरूआती दौर से कुछ कर गुजरने की क्षमता रखने वाले रहे हैं।

2014 चुनाव में बसपा से लड़ा सपा के खिलाफ, मिली हार-

जलेसर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सपा से सांसद रहे प्रो. बघेल वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा में शामिल हो गए थे । चुनाव में अखिलेश यादव और डिंपल यादव के खिलाफ दम दिखाने पर बसपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। साथ ही राष्ट्रीय महासचिव का ओहदा भी दिया। साल 2014 में फिरोजाबाद लोकसभा से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव के सामने उन्होंने चुनाव लड़ा, हालांकि वह यह चुनाव हार गए थे। उन्होंने बसपा पर जबरन चुनाव हरवाने का आरोप लगाया था। जिसके बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा ने उन्हें पिछड़ा वर्ग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। 2017 में टूंडला सुरक्षित सीट से भाजपा विधायक बनने के बाद उन्हें योगी सरकार में पशुधन मंत्री बना दिया गया।

आज भी है गांव की माटी से प्रो.बघेल का जुड़ाव बना हुआ है-

ग्राम भटपुरा के ग्रामीण बताते हैं कि प्रोफेसर साहब का अपनी माटी से आज भी जुड़ाव है। पिछले वर्ष हुए प्रधानी के चुनाव तक उन्होंने ग्राम उमरी से अपना वोट नहीं कटवाया था । वह उमरी से चुनाव लड़ रहीं अपने भतीजे की बहू प्रेमिना के लिए वोट डालने आए थे।

बड़े नेताओं से बघेल की नजदीकी बढ़ती-

भाजपा और संघ के बडे़ नेताओं से बघेल की नजदीकी बढ़ती गई। विधानसभा चुनाव आने पर आगरा और अलीगढ़ मंडल में बघेलों के साथ-साथ निषाद, लोधे और कुशवाह वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने टूंडला सीट से बघेल को विधानसभा चुनाव लड़ाया। बघेल मुख्यत पिछड़ा वर्ग से आते हैं, लेकिन बघेल की उपजाति गड़रिया अनुसूचित जाति में शामिल है। पिछड़ा वर्ग का चेहरा होने के बाद भी अनुसूचित जाति के उनके प्रमाणपत्र ने चुनाव में तुरुप के पत्ते का काम किया । हालांकि उनके प्रमाणपत्र पर काफी हंगामा भी हुआ, शिकायतें भी हुईं, लेकिन पत्रावलियां उनके पक्ष में थी। लिहाजा बघेल सुरक्षित सीट पर चुनाव लडे़ और जीत गए। बघेल को भाजपा ने स्टार प्रचारक बनाया और उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई। चुनाव में बघेलों के गढ़ में चुनावी सभा कराने के लिए बघेल को पार्टी ने हेलीकाप्टर भी मुहैया कराया। फिरोजाबाद जिले की पांच सीटों के साथ-साथ आगरा की सीटों और अलीगढ़ मंडल की सीटों पर भी बघेल के प्रभाव का पार्टी ने आंकलन किया।