
इटावा. बढ़पुरा थाना में एक सैनिक के साथ मारपीट के मामले में निचली अदालत ने पिता और पुत्र को दोषी करार दिया है। ये गैर इरादतन मामला है। इस मामले में पिता और पुत्र को दस साल की सजा सुनाई गयी है। पिता का नाम सुरेंद्र सिंह हरीशंकर है और बेटे का नाम सोनेलाल है।
50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा
अपराध के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। अब तो आलम ये है कि पुलिस वालों को भी इसमें शामिल कर दिया गया है। पिता और पुत्र पर 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न अदा करने पर दो-दो साल और जेल में रहना पड़ेगा।
पहले से गढ़ी जाती थी साजिश
बढ़पुरा निवासी राजकुमार ने 25 जून 2015 को मामला दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने बताया कि उनके पिता डिलाई बाबू प्लॉट में सुबह साढ़े आठ बजे सफाई कर रहे थे। ये प्लॉट आरोपियों के घर से सटा हुआ है। मामला प्लॉट का था, तो इसको लेकर दुश्मनी चलती रहती थी। गांव के सुरेंद्र सिंह और उनके पुत्र सोनेलाल परिवार वालों के साथ मिलकर साजिशें रचते थे। ये इसी रंजिश का नतीजा है कि 25 जून को सुरेंद्र सिंह पुत्र हरीशंकर व सोनेलाल पुत्र सुरेंद्र दोनों पिता-पुत्र अपने हाथों में कुल्हाड़ी व भाला लेकर पिता को जान से मारने की नियत से प्लॉट पर आए।
मिली जान से मारने की धमकी
बात यहीं नहीं रुकी बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी गयी। इस बीच पुत्री रागिनी, शीनू व माता शांति देवी ने शोर मचाया तो गांव वाले आ गए। ग्रामीणों ने घटना देखी थी। घायल पिता को लेकर राजकुमार उदी के सरकारी अस्पताल ले गए। गंभीर होने पर उपचार के दौरान डिलाई बाबू की मृत्यु हो गई। थाना पुलिस ने इस मामले में गैर इरादतन हत्या के तहत तरमीम किया था।
मृतक डिलाई बाबू की उम्र 75 वर्ष थी। मामले के सम्यक एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सुरेंद्र सिंह एवं सोनेलाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 304/34 के अंतर्गत 10-10 वर्ष की सजा तथा 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
Published on:
19 Jan 2018 02:31 pm

