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इटावा डुप्लीकेट पेसमेकर मामला: मरे व्यक्तियों के पेसमेकर का भी किया गया दोबारा इस्तेमाल, जांच में खुलासा

उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई इटावा में मरीज को डुप्लीकेट पेसमेकर लगाया जाता था। जांच में अब एक नया खुलासा सामने आया है कि मृत मरीजों के पेसमेकर भी निकाल कर दोबारा लगाया जाता था।

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इटावा डुप्लीकेट पेसमेकर मामला: मरे व्यक्तियों के पेसमेकर का भी किया गया दोबारा इस्तेमाल, जांच में खुलासा

इटावा डुप्लीकेट पेसमेकर मामला: मरे व्यक्तियों के पेसमेकर का भी किया गया दोबारा इस्तेमाल, जांच में खुलासा

उत्तर प्रदेश के इटावा में आयुर्विज्ञान संस्थान का कार्डियोलॉजी विभाग विवादों में है। विभागाध्यक्ष डॉक्टर समीर पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। मरीज और तीमारदारों को विश्वास में लेकर हृदय रोग विशेषज्ञ घटिया पेसमेकर लगता था। यहां तक की मृत व्यक्तियों के शरीर से पेसमेकर निकाल कर मरीज को लगा देता था। पुलिस की जांच में अब तक 25 मरीज की मौत की जानकारी सामने आ चुकी है।

एसएसपी इटावा डॉक्टर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि डॉ समीर दोगुनी कीमत लेकर मरीज को डुप्लीकेट पेसमेकर लगता था। कंपनी की तरफ से डॉक्टर समीर को विदेश यात्रा भी कर चुकी है। दो से ढाई करोड रुपए की अनियमितताएं पकड़ी गई है।

मृत मरीजों के पेसमेकर दोबारा लगाया गया

पुलिस की जांच में निकलकर सामने आया है कि ऐसे मरीज जिनकी मृत्यु पेसमेकर लगाने के 24 से 48 घंटे के भीतर हो जाती थी। उन मरीजों को जांच के बहाने फिर ऑपरेशन थिएटर ले जाते थे और पेसमेकर को निकाल लेते थे। यही पेसमेकर दूसरे मरीजों को लगा दिया जाता था। जिसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी।

विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं

एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार 600 से ज्यादा मरीजों को डुप्लीकेट पेसमेकर लगाया गया है। ऐसे मरीजों की पहचान की जा रही है। ‌पुलिस विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जिससे पूरी जानकारी मिल सके।

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प्राइवेट प्रैक्टिस भी करता था डॉक्टर समीर

पुलिस को जानकारी मिली है कि डॉक्टर समीर प्राइवेट नर्सिंग होम में भी प्रैक्टिस करता था। जो आगरा, मैनपुरी, झांसी, ललितपुर के साथ इटावा में है। ऐसे क्लिनिक को भी जांच के दायरे में रखा गया है। एसएसपी इटावा के निर्देश पर सीओ सैफई नागेंद्र चौबे जांच कर रहे हैं। डॉ समीर के पासपोर्ट को रद्द करने की भी कार्रवाई शुरू हो गई है। इस संबंध में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी लखनऊ को पत्र भेजा गया है।