
Mazar located in forest of Etawah will be removed: इटावा के घने जंगलों के बीच स्थित सैयद मजार को लेकर वन विभाग की अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अपने आदेश में उन्होंने बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत आरक्षित वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर वानिकी कार्य बिना उच्च स्तरीय अनुमति नहीं किया जा सकता है। घने जंगल के बीच मौजूद मजार को अवैध घोषित करते हुए हटाए जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि मजार के पक्षकारों का कहना है कि यह 800 साल पुराना है। अब मजार पर बुलडोजर चलाई जाने की चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तर प्रदेश के इटावा के घने जंगलों के बीच सैयद मजार स्थित है। इसके खिलाफ शिकायत आई थी। शुरुआती जांच में मजार की देखरेख करने वालों से जमीन संबंधी कागज मांगे गए। इसके साथ ही मजार पर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। अब वन विभाग की अदालत में दो महीने की सुनवाई के बाद आदेश दिया।
जिसमें उन्होंने बताया कि मजार के पक्षकार मजार को 800 साल पुराना बता रहे हैं। उन्हें जमीन संबंधी साक्ष्य दिखाए जाने को कहा गया, लेकिन इस संबंध में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद मजार को अवैध घोषित कर दिया गया।
अपने आदेश में वन न्यायालय ने बताया है कि यह भूमि 1916, 1939, और 1946 के गजट में आरक्षित वन क्षेत्र में घोषित है। यहां पर किसी भी प्रकार का गैर-वन नीति कार्य कानून अवैध है। मजार के साथ करीब 1800 वर्ग फीट भूमि पर कब्जा किया गया था। वन अदालत ने मजार को वैध घोषित करते हुए हटाने का आदेश दिया है।
अपने आदेश में वन न्यायालय ने बताया है कि यह कार्रवाई भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत की गई है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर-वानिकी कार्य नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उच्च-स्तरीय अनुमति की जरूरत है।
मजार के पक्षकारों का कहना था कि यह मजार 800 साल पुराना है। इसके अतिरिक्त उनके पास कोई भी साक्ष्य नहीं है। जबकि मजार के पक्षकारों को कई अवसर दिए गए। अब मजार पर बुलडोजर चलाने की चर्चा तेज हो गई है। इसके पहले शिकायत मिलने पर मजार में आने जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी।
Published on:
19 Apr 2026 07:25 pm
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