
इस डॉक्टर से पहली बार मिलकर ही मुलायम हुए थे इतने प्रभावित, दे दी बड़ी जिम्मेदारी, जब ये गए तो सभी की आंखें थी नम
इटावा. उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति डा. ब्रिगे. टी. प्रभाकर को विश्वविद्यालय कर्मियों ने नम आंखों से भावभीनी विदाई दी। विदाई अवसर पर बोलते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डा. (ब्रिगे.) टी. प्रभाकर ने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय से विशेष लगाव रहा है और हमेशा रहेगा। विश्वविद्यालय के सभी फैकेल्टी मेम्बर एवं कर्मियों से उनका लम्बा जुड़ाव रहा है।
मुलायम सिंह यादव ने देखा था सपना
आपको बता दें कि नेता जी मुलायम सिंह यादव जब 1996 में हिन्दुस्तान के रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने एक सपना देखा था कि उनके गांव में देश-दुनिया का ऐसा अस्पताल बने, जिसकी कोई दूसरी मिसाल न हो। सैफई गांव में अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाने का नेताजी का सपना 2006 में तब पूरा हुआ जब केंद्र सरकार ने यूपी रूरल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रिसर्च को अपनी मंजूरी दे दी। नेताजी के सपने को पूरा करने में जिस शख्स ने सबसे अहम भूमिका निभायी है वह हैं डा. ब्रिगेडियर टी. प्रभाकर, जो कि सैफई अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर रहे। जब कॉलेज को विश्वविधालय का दर्जा मिला तो उनका पहला वाइस चांसलर बनने का मौका भी मिला।
प्रभाकर से नेताजी हुए थे प्रभावित
डा. टी.प्रभाकर के सैफई मे मेडिकल कॉलेज से लेकर यूनीवर्सिटी को स्थापित करने के अहम योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। नेताजी जब रक्षा मंत्री थे तो उस समय डा. प्रभाकर उनके संपर्क में आए थे। दरअसल, भारतीय सेना ने सैफई में आंखों की जांच के लिए एक कैम्प लगाया था। उस कैम्प के कर्ता-धर्ता डा. ब्रिगेडियर टी. प्रभाकर थे। कैम्प के आयोजन और उसे सफल बनाने में डा. प्रभाकर की मेहनत, लगन और सेवा भावना को देखकर नेताजी उनसे बहुत प्रभावित हुए थे। कैम्प खत्म होने के बाद नेताजी ने डा. प्रभाकर से कहा था कि मैं चाहता हूं कि सैफई में एक बड़ा अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बने जिसमें इस इलाके के हजारों, लाखों मरीजों का सस्ते में बेहतर इलाज हो। तब डा. प्रभाकर ने नेताजी से कहा था कि सैफई में अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाने का आपका जो सपना है वह जरूर पूरा होगा। लेकिन उस समय डा.प्रभाकर ने यह नहीं सोचा था कि सैफई में जब मेडिकल कॉलेज बनेगा तो एक दिन वह उसके डायरेक्टर भी होंगे। किसी गांव में अत्याधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाना बेहद कठिन काम है।
नेताजी का सपना बना बड़ा
सैफई अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया। विश्वविधालय के रूप में सामने आ चुका नेताजी द्वारा रोपा हुआ पौधा अब बहुत बड़ा वृक्ष बन चुका है। 100 बेड से शुरू हुए अस्पताल में आज 900 बेड हैं। सभी बेड हमेशा शत-प्रतिशत भरे रहते हैं। मेडिकल कॉलेज जब शुरू हुआ था तो एमबीबीएस 15 तक हो गयी हैं। सैफई मेडिकल कॉलेज हिन्दुस्तान का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज है जो गांव में है। पूर्णतया वातानुकूलित यह अस्पताल किसी कारर्पाेरेट अस्पताल से कम नहीं है। कारर्पाेरेट अस्पतालों में जहां मरीजों से इलाज के लिए भारी-भरकम धनराशि ली जाती है वहीं इस अस्पताल में गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज मुफ्त में किया जाता है। मरीजों की सभी जांचें मुफ्त में होती हैं और उन्हें दवाइयां भी फ्री में दी जाती हैं। यहां पर विशेषज्ञ द्वारा हार्ट सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, पेडियाट्रिक सर्जरी की जाती है। मेडिकल कॉलेज में बर्न सेंटर भी स्थापित है, जहां जले और झुलसे लोगों का इलाज सफलतार्पूवक किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर मे मरीजो को बेहतर इलाज मिलता है। सैफई मेडिकल यूनीवर्सिटी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ ही मध्य प्रदेश , राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। यह गर्व की बात है कि यहां इलाज के लिए विदेशों से भी मरीज आ रहे हैं।
सभी के साथ मिलकर की मेहनत
इस मौके पर डा. प्रभाकर ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय उन्हें संस्थान के रूप में मिला जिसे उन्होंने चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की मदद से विश्वविद्यालय बनाने में सफलता पायी। उनका हमेशा यह प्रयास रहा कि विश्वविद्यालय में मरीजों के लिए जरूरी सभी सुविधायें उपलब्ध रहें और इसमें उन्हें बहुत हद तक सफलता भी मिली। उन्होंने उम्मीद जतायी कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं अपितु देश के उत्कृष्ट चिकित्सा एवं शोध संस्थानों में गिना जायेगा। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की भी सराहना की। कुलसचिव पी.के. जैन ने कुलपति महोदय के नेतृत्व क्षमता और सबको साथ लेकर चलने को उनके व्यक्तित्व का विशेष गुण माना वहीं प्रतिकुलपति डा. रमाकान्त यादव ने कुलपति महोदय की अदम्य इच्छाशक्ति को अनुकरणीय माना। चिकित्सा अधीक्षक डा. आदेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय रूपी पौधे को सींचकर कुलपति ने वृक्ष का रूप दिया जिसकी छाया में आज स्थानीय ही नहीं बल्कि आस-पास के जनपदों के लोग भी इसका लाभ उठा रहे हैं।
ये लोग रहे मौजूद
विदाई समारोह में फैकेल्टी मेम्बर के अलावा, प्रशासकीय, लेखा, नर्सिंग और तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. रमाकान्त यादव, कुलसचिव पीके जैन, चिकित्सा अधीक्षक डा. आदेश कुमार, ज्वाइंट रजिस्ट्रार प्रशासन के.बी. अग्रवाल, ज्वाइंट रजिस्ट्रार लेखा विपिन कुमार, डिप्टी रजिस्ट्रार उमाशंकर, नर्सिंग अधीक्षिका लवली जेम्स, एसपीओ चन्द्रकांत मंगरूलकर, पीआरओ अनिल कुमार पाण्डेय के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के फैकेल्टी मेम्बर, चिकित्सक, अधिकारी और कर्मचारी भारी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान फैकेल्टी मेम्बर और अधिकारियों ने कुलपति महोदय के साथ बिताये अपने खट्ठे-मीठे अनुभवों को व्यक्त किया और साथ ही उनके द्वारा स्थापित अनुशासन व उनकी विशिष्ठ कार्यशैली की प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन ज्वाइंट रजिस्ट्रार के.बी. अग्रवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अन्त में प्रशासनिक विभाग के कार्मिकों द्वारा कुलपति महोदय को शॉल ओढ़ा कर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान 28वीं वाहिनी पीएसी के बैण्ड द्वारा मनमोहक धुनों को बजाया गया।
Published on:
01 Jun 2018 11:14 am
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