
माह-ए-रमजान: खुदा की इबादत करने मे जुटे कैदी, जेल में रख रहे हैं रोजा
दिनेश शाक्य
इटावा. उत्तर प्रदेश में इटावा जिला जेल की चहारदीवारी भी बंदियों को खुदा का फर्ज अदा करने से नहीं रोक पा रही है। रमजान के पाक महीने में जेल में बन्द 70 से अधिक बन्दी रोजे रखकर खुदा की इबादत में लगे हुए हैं और अपनी गलतियों से तौबा कर रहे हैं। कई बंदियों के द्वारा रात के समय तराबीह भी पढ़ी जा रही हैं। जेल प्रशासन ने इन बंदियों के शहरी व इफ्तार के लिए भी अलग से इंतजाम किये हैं।
दिया जाता है ये सामान
इटावा जिला जेल के जेलर मुकेश कटियार ने बताया कि रोजा रखने वाले बंदियों को प्रतिदिन एक पैकेट दूध, 100 ग्राम चीनी, दो बिस्किट, दो केले व दो नींबू इफ्तार के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं सहरी के लिए भी सामान उपलब्ध कराया जाता है। ईद के त्योहार पर बंदियों के लिए विशेष पकवान भी जेल मेन्युअल के अनुसार बनवाए जाएंगे।
जेल में कैदी रख रहे हैं रोजा
रमजान का पाक महीना चांद दिखने के बाद 17 मई से शुरु हो गया था। शहर की मस्जिदों में इन दिनों इफ्तार के बाद तरावीह का दौर जारी है। हर बालिग मुसलमान के लिए रोजा एक फर्ज है और इस फर्ज को जेल के 70 मुस्लिम बन्दी भी पूरी तरह से निभा रहे हैं। उनके द्वारा समय से सहरी की जा रही है ओर रोजा भी खोला जाता है। वैसे तो जेल में इन दिनों 1850 से अधिक बंदी निरूद्ध हैं। इन निरूद्ध बंदियों में 70 मुस्लिम बंदी जेल की चहारदीवारी में रहते हुए भी खुदा के फर्ज को रोजा रखकर अदा कर रहे हैं। मुस्लिम जानकारों के अनुसार रोजा रखना हर बालिग मुसलमान का फर्ज है। इस्लाम के पांच फर्ज हैं, जिनमें रोजा भी शामिल है।
नेकियों का बढ़ जाता है पुण्य
बताया गया है कि रमजान में नेकियों का पुण्य 70 गुना अधिक बढ़ जाता है। कुरआन के एक अक्षर के पाठ पर आम दिनों में 10 नेकी मिलती है, जबकि रमजान के महीने में कुरआन के एक अक्षर के पाठ पर यह नेकी बढ़कर 700 हो जाती है। इसे आत्मा के प्रशिक्षण का भी महीना कहा गया है। माना जाता है कि रोजेदार रोजा रखकर आत्मा को पवित्र करते हैं और इस महीने में खुदा से निकटता को भी प्राप्त करते हैं।
अदा कराई जाएगी नमाज
जेल में जो बंदी रोजा रखे हुए हैं। इसके अलावा अन्य मुस्लिम बंदी जो रोजा नहीं रख रहे हैं उनके लिए अलविदा जुमा और ईद पर विशेष नमाज अदा कराई जाएगी। नमाज अदा कराने के लिए बाहर के मौलवी को भी बुलाया जाएगा। जेलर मुकेश कटियार ने बताया कि रोजा रखने वाले बंदियों को प्रतिदिन एक पैकेट दूध, 100 ग्राम चीनी, दो बिस्किट, दो केले व दो नीबू इफ्तार के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं सहरी के लिए भी सामान उपलब्ध कराया जाता है। ईद के त्योहार पर बंदियों के लिए विशेष पकवान भी जेल मेन्युअल के अनुसार बनवाए जाएंगे।
बंदियों का कराया जाता था रोजा इफ्तार
जेल में जो बंदी निरुद्ध हैं उनमें से काफी बंदियों के द्वारा रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखा जाता है। पिछले वर्ष तक शहरी की कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलग-अलग दिनों में बंदियों को रोजा इफ्तार कराया जाता था लेकिन इस बार रमजान को शुरु हुए 12 दिन बीत चुके हैं और जेल में 70 से अधिक बंदी रोजा रखे हुए हैं। अभी तक शहर की किसी भी सामाजिक और मुस्लिम संस्था के द्वारा बंदियों को रोजा इफ्तार नहीं कराया गया है।
Published on:
29 May 2018 09:07 am
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