
लगातार बदहाली की ओर जा रही हैं इटावा की नदियां, नहीं बन रही कोई कारगर योजना
दिनेश शाक्य
इटावा. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे पवित्र नदी के रूप में पहचानी जाने वाली गंगा नदी के अस्तित्व को बचाने की दिशा में संसदीय चुनाव दौरान जोर शोर से मुददा उठाया लेकिन उसके बावजूद गंगा की सफाई की दिशा में सतही तौर पर कोई प्रगति नहीं दिखती है। बिल्कुल ही ऐसा ही देश के इकलौते पांच नदियों के संगम स्थल पंचनदा के इटावा जिले में भी देखने को मिल रहा है। जहां पर यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु और पहुज जैसी नदियों का मिलन होता है। लेकिन इन नदियों की ऐसी दुर्दशा बनी हुई है जिस पर कई बार चिंता जताई जा चुकी है। लेकिन अभी तक इनके उद्धार के लिए कोई कारगर योजना नहीं बन सकी।
यमुना नदी
अगर यमुना नदी की बात करे तो इटावा मे यमुना नदी बेहद ही जर्जर और दुर्दशाग्रस्त होती चली जा रही है। यमुना नदी के जल को कभी राजतिलक करने के काम में प्रयोग किया जाता था लेकिन आज उसी यमुना नदी के जल को कोई छूना भी पसन्द नहीं कर रहा है। वजह साफ है कि यमुना नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि वह एक नदी न होकर कचरे का नाला बनकर रह गयी है, धार्मिक नदी का दर्जा पाये यमुना नदी के इस हाल के लिये असल में जिम्मेदार हैं कौन ? यमुना की दर्दुशा पर कई बार चिंता जताई जा चुकी है लेकिन सुधार की कोई संभावनाए नही दिखलाई दे रही है।
जापान सरकार की सहायता से यमुना नदी के प्रदूषण को दूर करने के लिए अर्से पहले देश में यमुना एक्शन प्लान बड़ी जोर-शोर से चलाया गया था। इस प्लान से लगा कि यमुना नदी का प्रदूषण चुटकियों में दूर हो जाएगा लेकिन हकीकत में यमुना आज भी मैली ही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यमुना के पानी में अमोनिया की मात्रा इतनी अधिक हो गई है कि इसे साफ करना जलशोधक संयंत्रों के बस की बात नहीं रह गई है। यही नहीं अमोनिया के साथ अन्य घातक रसायन भी पानी में जहर घोल रहे हैं। दरअसल पिछले कई दशकों से औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण के कारण प्रमुख नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।
चंबल नदी
चंबल नदी का पानी मिनरल वाटर का मुकाबला करता नजर आ रहा है। इस नदी की बात करते हुए गर्व का एहसास हो रहा है। बीहडी इलाके से प्रवाहित होने वाली चंबल नदी,जिसके साफ पानी की कई मिसाले लगातार दी जा रही है इस नदी से हजारो लोगो की जीवन चर्चा जिंदा है क्यो कि चंबल के पानी को लोग ना केवल पीने के तौर पर इस्तेमाल करते है बल्कि दैनिक क्रियाओ मे भी प्रयोग लाते है। यह पश्चिमी मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है। चंबल इस पठार की एक प्रमुख नदी है। विदर्भ के राजा चेदि ने ही चम्बल और केन नदियों के बीच चेदि राज्य की स्थापना की थी। जिसे बाद में कुरू की पाँचवीं पीढ़ी में बसु ने यादवों के इसी चेदिराज्य पर विजय श्री प्राप्त की और केन नदी के तट पर शक्तिमति नगर को अपनी राजधानी बनाया। ऐसा कहा जाता है। कि चेदि राज्य ईसा पूर्व का है। चम्बल नदी का उद्गम मालवा पठार में इन्दौर जिले के महू के पास जनपाव पहाड़ी से हुआ है जो समुद्र तल से 616 मीटर ऊँची है। इसी नदी को चर्मण्वती भी कहा जाता है। यह महू के निकट से निकलकर धार, उज्जैन, रतलाम, मन्दसौर, शिवपुर, बूंदी, कोटा, धौलपुर होती हुई इटावा से 38 किलोमीटर दूर 1040 किलोमीटर की अपनी जीवन यात्रा पूरी करके यमुना में विसर्जित हो जाती है। चंबल नदी दुर्लभ घडियाल,मगरमच्छ,कछुओ,डाल्फिन के अलावा कई सैकडा दुर्लभ जलचरो का भी प्राकृतिक संरक्षण करती है इन्ही जलचरो को बचाने के लिए चंबल सेंचुरी की स्थापना की गई है लेकिन साल 2008 के आखिर दिनो मे आई आपदा ने दौ सौ से अधिक घडियालो के अलावा दर्जन भर मगरमच्छ और आधा दर्जन के आसपास डाल्फिनो को मौत की नींद मे सुला दिया है चंबल के जलचरो पर आई आपदा इससे पहले ना तो देखी गई और ना सुनी गई देश विदेश के सैकडो विशेषज्ञो ने चंबल मे आकर कई किस्म के परीक्षण किये लेकिन आज तक नतीजे सामने नही आ सके है लेकिन उस समय विशेषज्ञो ने राय दी कि चंबल का पानी जहरीला हो गया है इसके बावजूद आज चंबल के पानी को पीने वालो को कोई नुकसान किसी भी स्तर का नही हुआ है बल्कि उनको भला चंगा देखा जा सकता है।
क्वारी नदी
चंबल यमुना की ही तरह ही क्वारी नदी भी चंबल इलाके के लोगो के लिए लाइफ लाइन का काम करती है लेकिन आज इस लाइफ लाइन को ही पानी माफियाओ ने बरवाद कर दिया है। क्वारी नदी के पानी पर मध्यप्रदेश के किसानो ने डाका डाल दिया है तभी तो उत्तर प्रदेश के किसानो मे त्राहि त्राहि मच हुई। क्वारी नदी करीब 10 सालो से पूरी तरह से सूख गई है लेकिन हकीकत मे इस नदी के पानी पर मध्यप्रदेश के दंबग किसानो ने डाका डालते चले आ रहे है। क्वारी नदी के किनारे बसे ग्राम सोने का पुरा, उखरैला, चंद्रहंसपुरा, भोया, पसिया, रामकिला, विंडवाखुर्द, हनुमंतपुरा, सिंडौस, खौड़न, कुंअरपुर कुर्छा, अजीत की गढिया, जाहरपुरा, पहलन, विडौरी, रीतौर की मड़ैया, सहित लगभग एक सैकडा से अधिक गांवो के पशु भी इसी नदी में पानी पीते हैं। कुछ ऐसी ही दयनीय हालात मे इटावा की अन्य नदिया भी है क्यो कि आम दिनो मे थोडा बहुत पानी रहने वाली सेंगर,अहनैया,सिरसा,अरिंद और पांडु नदियो का हाल भी है क्यो कि इस समय गर्मी के दिनो मे पानी इन नदियो के खोजने से मिलता हुआ नही दिख रहा है।
नदी सूखी हुई आएगी नजर
वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि दुर्गम बीहड़ी इलाकों में से प्रभावित होकर बहने वाली चंबल नदी का पानी यदि इटावा में यमुना नदी में ना मिले तो यमुना नदी सूखी हुई ही नजर आएगी।
नदी में पानी न होने के चलते जलचरों को नुकसान
सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर,पर्यावरणीय संस्था के संजीव चौहान ने कहा कि यमुना नदी में अब पानी तो रहा ही नहीं हैं, इस वजह से यमुना नदी मे पाये जाने वाले जलचरों को भी भारी नुकसान की संभावना से कतई इंकार नही किया जा सकता है। कभी यमुना नदी मे इतना पानी हमेशा रहता रहा है कि तमाम प्रकार की मछलिया इसमे बडे आराम से रहती रही है लेकिन आज यमुना मे कुछेक प्रकार की ही मछलिया ही देखी जा रही है
लंबे समय से नदी की दुर्दशा
हनुमान गढ़ी के आंनदेश्वर गिरी महाराज ने कहा कि इटावा में यमुना नदी की दुर्दशा का आलम लंबे समय से नजर आ रहा है। हनुमान गढी से यमुना नदी की बदहाली को कायदे से देखा जाता है। यमुना नदी मे इतनी गंदगी है कि उसको पानी को छूने की हिम्मत किसी की भी नही होती है।
Published on:
12 Jun 2018 09:26 am
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