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Video..एसी, कूलर से निकलकर सीधे धूप में न जाएं, जा सकत है जान

भीषण गर्मी पढ़ रही है। ऐसे में एसी और कूलर से सीधे निकलकर खुली धूप में न जाएं। इसी तरह से बाहर के तापमान में कार्य करते हुए सीधे कूलरों व एसी कमरों में नहीं जाना चाहिए। इससे लू की जद में आने से बचा पाना मुश्किल है। गर्मी जिस तरह से इस वक्त है, उसमें धूप का चश्मा, सफेद कपड़े से कानों को ढक कर चलें। इस मौसम में शरीर का पानी पसीना के रूप में निकलता है। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। उक्त बातें लू प्रबंधन को लेकर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष शर्मा ने कही।

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भिलाई

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Abdul Salam

Apr 30, 2024

भीषण गर्मी पढ़ रही है। ऐसे में एसी और कूलर से सीधे निकलकर खुली धूप में न जाएं। इसी तरह से बाहर के तापमान में कार्य करते हुए सीधे कूलरों व एसी कमरों में नहीं जाना चाहिए। इससे लू की जद में आने से बचा पाना मुश्किल है। गर्मी जिस तरह से इस वक्त है, उसमें धूप का चश्मा, सफेद कपड़े से कानों को ढक कर चलें। इस मौसम में शरीर का पानी पसीना के रूप में निकलता है। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। उक्त बातें लू प्रबंधन को लेकर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष शर्मा ने कही।

हो सकती है मौत

उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मिलने वाले ओआरएस घोल ऐसे में कारगर है। सभी को इसका गर्मी में इस्तेमाल करना चाहिए, शरीर में पानी की कमी को दूर करता है। इसके मिश्रण में ग्लूकोज, इलेक्ट्रोड्स की कमी और तरल पदार्थ की कमी दूर करने में बड़ा रोल है। लू से बचाव नहीं करने पर अचानक मौत भी हो जाती है।

धूप में न निकलें खाली पेट

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई 3 में मंगलवार को बीईटीओ व स्वास्थ्य सुपरवाइजर सैयद असलम ने बताया कि गर्मी में पूरे अस्तीन की शर्ट पहनकर बाहर निकलें। गर्मी में खाली पेट नहीं निकलना चाहिए, हो सके तो बिना वजह के सुबह 11 बजे से 4 बजे तक घर में ही रहें। हर घर में एक गिलास पानी में एक चुटकी नमक, दो बूंद नींबू का रस और एक चम्मच शक्कर से घरेलू नुस्खे से भी जीवन रक्षक घोल मनाया जा सकता है।

प्रदेश सचिव ने लोगों को जागरूक करने दिया निर्देश

उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिला में जागरूकता अभियान चलाकर इसके प्रति जागरूक करने निर्देश दिए हैं। वहीं मेडिकल आफिसर डॉक्टर भुनेश्वर कठौतिया ने बताया शरीर का तापमान जब न्यूनतम तापमान से अधिक हो जाए, इसके कारण तेज बुखार, उल्टी लगना, बेहोश होकर गिर जाएं, तो यह प्रारंभिक लक्ष्ण हैं। इसको इग्नोर नहीं करना चाहिए।

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