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बजट के अभाव में अटकी गुमनामी बाबा के सामानों के प्रदर्शनी की योजना 

अभी तक निदेशालय संग्रहालय के तत्कालीन निदेशक डॉ. अजय पाण्डेय कह रहे थे कि अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में अधिकतम दो माह में गैलरियों के निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।

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Sujeet Verma

May 04, 2016

faizabad

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अयोध्या.साल 31 जनवरी 2013 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैजाबाद के राम भवन में रहने वाले भगवानजी उर्फ़ गुमनामी बाबा के प्रकरण में आदेश जारी करते हुए कहा था कि फैजाबाद जिला कलेक्ट्रेट के कोषागार के डबल लॉक में रखे गुमनामी बाबा के सामानों को संग्रहालय में संरक्षित कर उसकी प्रदर्शनी लगाई जाए, लेकिन सरकारी लेटलतीफी का आलम इस कदर है कि इस आदेश के तीन साल बीत जाने के बाद किसी तरह जिला कोषागार से सामानों को निकालकर उनका परीक्षण कराया गया और प्रदर्शनी योग्य सामानों की छंटाई तो कर ली गई, लेकिन उनकी प्रदर्शनी की योजना बजट अभाव में अधर में अटकी है। भले ही प्रदेश सरकार की मंशा चाहे जितनी साफ हो, लेकिन लालफीताशाही की अड़ंगेबाजी के आगे हुक्मरान कितने बेबस होते हैं, इसका ताजा प्रमाण है गुमनामी बाबा ऊर्फ भगवानजी के सामानों के प्रदर्शनी का मामला।

गौरतलब है कि बीते मार्च महीने में शाशन द्वारा भेजे गए विशेषज्ञों की टीम ने करीब महीने भर में गुमनामी बाबा के सामानों की जांच के बाद प्रदर्शनी योग्य सामानों को अलग किया और उन्हें फैजाबाद के जिला कोषागार के डबल लाक से निकालकर अयोध्या के श्री राम कथा संग्रहालय में लाकर रखवा दिया गया। इससे उन सामानों को म्यूजियम की शक्ल देकर आम जनता के दर्शनार्थ खोल दिया जाए।

इस मामले में अभी तक निदेशालय संग्रहालय के तत्कालीन निदेशक डॉ. अजय पाण्डेय कह रहे थे कि अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में अधिकतम दो माह में गैलरियों के निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। प्रदर्शनी लगा दी जाएगी, लेकिन उनके स्थानान्तरण के बाद यह योजना अधर में लटक गयी है। इसका कारण यह है कि जिस काम को पहले होना है, उसका तो बजट ही नहीं है और जिस काम को बाद में कराया जाना है, उसका बजट भी स्वीकृत हो गया और उसका स्टीमेट भी स्वीकृति के लिए भेज दिया गया। अब जब तक पहले का कार्य नहीं होगा दूसरा कार्य शुरू भी कैसे हो? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

जब तक हाल दुरुस्त नहीं होगा तब तक नही बन सकेंगीं गैलरियां
कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने गुमनामी बाबा के सामानों की प्रदर्शनी के लिए गैलरियों के निर्माण के मद में प्रथम चरण में करीब 71 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। वहीं, इस राशि के सापेक्ष कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के फैजाबाद यूनिट द्वारा कोलकाता से बुलवाए गए आर्किटेक्ट ने आगणन तैयार शासन को प्रेषित कर दिया है।

कार्यदाई संस्था के सहायक अभियंता एनके शुक्ल का कहना है कि सम्बन्धित योजना का डीपीआर भेजा गया था, लेकिन बजट की स्वीकृति में क्या हुआ, उन्हें नहीं मालूम? उन्होंने बताया कि फिलहाल शासन के अधिकारियों के निर्देश पर फॉल सीलिंग, वॉल पैनलिंग व फ्लोरिंग आदि कार्य के लिए एक करोड़ का अतिरिक्त आगणन स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि पहले फॉल सीलिंग व वॉल पैनलिंग एवं फ्लोरिंग कार्य होगा। उसी के बाद गैलरियों का निर्माण कार्य होगा। उधर संग्रहालय निदेशालय के नवागत निदेशक डॉ. एके सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्होंने जल्द ही कार्यभार संभाला है। फाइलों की वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले फॉल सीलिंग एवं वॉल पैनलिंग का काम तो पहले ही होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि गुमनामी बाबा का प्रकरण शासन में उच्च प्राथमिकता पर है, इसलिए जल्द ही अतिरिक्त कार्य का बजट स्वीकृत करा लिया जाएगा। बहरहाल वर्तमान हालत में गुमनामी बाबा के म्यूजियम के निर्माण की जो तस्वीर है वो बेहद धुंधली नज़र आ रही है इसके कारण आम जनता गुमनामी बाबा के सामानों को देखकर उनकी पहचान का अंदाजा कब लगा पाएगी ये कहना मुश्किल है ।