
Haryana news: दूषित पानी पीने से मौत का यह कोई नया या पहला मामला नहीं है। हाल ही में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में भी दूषित पानी के कारण कई लोगों की जान गई थी। यह साफ था कि ये मौतें जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते हुई थीं। इसी गैर-जिम्मेदारी पर जब एक पत्रकार ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया, तो उनके जवाब ने सबको हक्का-बक्का कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ था।
आपको बता दें कि हरियाणा के पलवल के छांयसा गांव में रविवार को हेपेटाइटिस-सी के 26 और हेपेटाइटिस-बी के तीन मरीजों की पुष्टि हुई है, जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 29 तक पहुंच गई है। हेपेटाइटिस-सी के 12 नए मामले सामने आने से गांव में दहशत का माहौल छाया हुआ है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में खास स्क्रीनिंग और टीकाकरण अभियान शुरू किया है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई घरों के पानी में दूषण मिलने के बाद अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई करते हुए 24 कनेक्शन काट दिए गए और अब पानी में क्लोरीन मिलाकर भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बीमारी और मौतों का सिलसिला काफी समय से जारी था, जिसे प्रशासन ने नजरअंदाज किया। जब स्थिति बेकाबू हुई और मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा, तब स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। जांच होने पर अब हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक हेपेटाइटिस-बी और सी से चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अन्य मौतें पीलिया से हुई हैं, जो हेपेटाइटिस का प्रमुख लक्षण है। जांच के दौरान एक युवक एचआईवी संक्रमित भी पाया गया है।
जन स्वास्थ्य विभाग की जांच में गांव के पानी में क्लोरीन की कमी पाई गई, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई। छह घरों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला, जो पानी के गंभीर रूप से दूषित होने का संकेत है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध कनेक्शन और पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी दूषित हो रहा था। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए 24 अवैध कनेक्शन काट दिए और पानी में क्लोरीन मिलाकर भेजना शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि हेपेटाइटिस के अधिकतर मामले 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में पाए गए हैं। गांव के कई युवक अन्य राज्यों में भारी वाहनों के चालक का काम करते हैं। संक्रमित सुई का उपयोग और झोलाछाप चिकित्सकों के इंजेक्शन लगाने से भी संक्रमण फैलने के संभावित कारण माने जा रहे हैं। फिलहाल गांव में 18 सक्रिय मरीज हैं, जिनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। सभी मरीजों को निगरानी में रखा गया है।
संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में विशेष अभियान शुरू किया है। रविवार को 80 और शनिवार को 70 लोगों को हेपेटाइटिस का टीका लगाया गया। गांव में लगाए गए विशेष ओपीडी शिविर में 193 लोगों की जांच की गई। पीएचसी छांयसा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि संक्रमित मरीजों के परिजनों और उनके संपर्क में आए लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव में निगरानी और जांच कर रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, यदि पानी की शुद्धता और लोगों की सेहत की वक्त पर जांच हो जाती, तो इन मौतों को रोका जा सकता था। गुस्साए ग्रामीणों ने अब लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अब स्वास्थ्य टीमें गांव में सक्रिय हैं, लेकिन चार जिंदगियां खोने के बाद 'जागे' इस सिस्टम के काम करने के तरीके पर ग्रामीण गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
Published on:
16 Feb 2026 01:50 pm
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