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महाशिवरात्रि में फर्रुखाबाद का श्रंगीरामपुर क्यों है खास

- श्रंगीरामपुर का पूरा इलाका आज महाशिरात्रि के पर्व पर गूंज रहा है- हर तरफ सिर्फ बम बम भोले, हर हर महादेव की सुनाई दे रही है गूंज

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महाशिरात्रि में फर्रुखाबाद का श्रंगीरामपुर क्यों है खास

महाशिरात्रि में फर्रुखाबाद का श्रंगीरामपुर क्यों है खास

फर्रुखाबाद. श्रंगीरामपुर का पूरा इलाका आज महाशिरात्रि के पर्व पर गूंज रहा है। हर तरफ सिर्फ बम बम भोले, हर हर महादेव की गूंज सुनाई दे रही है। श्रंगीरामपुर की यूपी सहित कई प्रदेशों में मान्यता है। माना जाता है कि यहां सभी की मनौती पूरी होती है। भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए मध्य प्रदेश के भक्त सूबे की सीमा लांघ यूपी में श्रंगीरामपुर के गंगा तट पर कांवर में गंगा जल भरने पहुंच रहे हैं।

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श्रंगीरामपुर का इतिहास क्या है? द्वापर युग मे सन्त श्रंगी ऋषि की तपोभूमि का इतिहास जानिए। श्रंगी ऋषि को श्राप के कारण उनके सींग निकल आये थे। श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने गंगा यात्रा शुरू की थी। जिसके बाद से उनके सींग घटने लगे। उसका नाम ढाईघाट पड़ गया।उसके बाद वह गंगा के किनारे एक बाग में तपस्या करने लगे जहां पर उनके सींग समाप्त हो गए थे। वहीं पर कलयुग में ही उनकी सेवा करने वालों ने गांव बसा लिया। श्रंगी ऋषि के नाम पर उस गांव का नाम श्रंगीरामपुर रखा गया था।

यहां पर कैसे पहुंचते लोग जानिए- इस महान ऋषि के दर्शन व गंगा घाट पर स्नान के लिए यदि ट्रेन से आना हो तो उन्ही के नाम से रेलवे स्टेशन है। निजी वाहन से किसी भी हाइवे से आसानी से पहुंचा जा सकता है। कानपुर से आने वाले भक्त भी रजीपुर कस्बा मुख्य मार्ग पर उतर कर टैक्सी से पहुंच सकता है।

आखिर यह कावरिया कहा चढ़ाते गंगा जल जानिए- तीन-चार सौ किलोमीटर पैदल चलकर पृथ्वीराज चौहान द्वारा स्थापित वन खंडेश्वर शिव मंदिर में कांवर रख गंगा जल चढ़ाने से भोले बाबा उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर भक्तों में कांवर चढ़ाने को लेकर गजब की श्रद्धा है। कांवरियों का जोश और जूनून देखते ही बनता है। कांवरियों में महिलाएं भी शामिल होती हैं। ऐतिहासिक तीर्थ स्थल श्रंगीरामपुर में महाशिवरात्रि तक चलने वाले कांवरिया मेले में लाखों की भीड़ आती है।

आखिर यहां से क्यों भरा जाता गंगा जल- बनारस व काशी के बाद फर्रुखाबाद जिले को अपरा काशी कहा जाता है। जिसका जिक्र महापुराणों में भी मिलता है। काशी के सबसे अधिक शिवालय फर्रुखाबाद में हुआ करते थे लेकिन आज नही मिलते है। गंगा जी तट है उसी वजह से कांवरिया यहां से जल भरने आते है।

कांवरियों का सैलाब- रजीपुर-जरारी मार्ग एवं रजीपुर-श्रंगीरामपुर मार्ग पर कांवरियों के जत्थों की लाइनें टूटने का नाम ही नहीं लेती है। रजीपुर चौराहे पर जाम की स्थिति बनी रही। कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग से गुजरने वाले वाहनों को निकालने के लिये पुलिस को मशक्कत करनी पड़ती है। श्रंगीरामपुर गंगा तट से जल भरकर भोले तेरी बम के जयघोष के साथ कांवरियों के जत्थे शिवालयों की ओर रवाना होते हैं। कांवरियों के जत्थे में महिलाएं भी शामिल रहतीं हैं।

गंगा घाट पर रहती है भीड़- पड़ोसी जनपद एटा, इटावा, कन्नौज आदि के अलावा मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया आदि से भी कांवरिये यहां आते हैं। हर जत्थे के साथ उनके निजी रक्षक भी हाथ में डंडे और हाकी लिए मुस्तैद नज़र आ रहे हैं। पैरों में घुंघरू बांधे कांवरिये विशेष तर्ज में साखी गाते रहते हैं।

सप्त ऋषि के रूप में विख्यात शृंगीरामपुर :- गंगा किनारे बसी तीर्थस्थली शृंगीरामपुर न केवल ऋषि शृंगी की तपोभूमि है, अपितु यह सप्त ऋषि क्षेत्र के रूप में भी विख्यात है। यहां पूर्व दिशा में च्यवन ऋषि आश्रम, एक किलोमीटर दूर खंता नाला के पास आयुर्वेद के जनक धनवंतरि ऋषि का आश्रम है। इसी के पास गुरगुजपुर में 24 अक्षरी गायत्री मंत्र के द्रष्टा याज्ञवल्क्य व बाघम्बर ऋषि के आश्रम हैं। पश्चिम में सर्प यज्ञ से सर्पों को बचाने वाले आस्तीक ऋषि का आश्रम बारामऊ में है। दक्षिण में खुदागंज रामाश्रम के सामने अष्टावक्र के नाना उद्दालक ऋषि का आश्रम है।