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Farrukhabad news: हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी शिक्षक को नहीं मिला वेतन, खाया जहरीला पदार्थ

फर्रुखाबाद में प्राइमरी स्कूल की शिक्षक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जहरीला पदार्थ खा लिया। इस संबंध में बीएसए ने भी स्पष्टीकरण दिया है।

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वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षक ने उठाया खौफनाक कम

शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में वेतन के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहा शिक्षक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। घर वालों ने स्थानीय सीएचसी में भर्ती कराया। जहां से उसे लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके पहले सहायक शिक्षक ने सुसाइड नोट भी लिखा है। जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों के ऊपर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा कि बकाया वेतन मांगने पर शिक्षा अधिकारियों ने उनका उपहास उड़ाया। आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। बीएसए ने बताया कि मामला 8 साल पुराना हो गया है। जिस पर निर्णय लेने का अधिकार उन्हें नहीं है। ‌

मामला प्राथमिक विद्यालय झब्बूपुर का है। अनिल कुमार त्रिपाठी निवासी काजम खां कायमगंज ने अपने पत्र में बताया है कि उनके पिता गिरीश चंद्र त्रिपाठी की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे से उनकी भर्ती हुई थी। बेसिक शिक्षा में उनकी सेवा 20 साल की हो चुकी है। जनवरी 2016 में फर्जी दस्तावेज के आधार पर भर्ती का आरोप लगाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट गए।

हाई कोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन

हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2016 को वेतन सहित बहाल करने का आदेश दिया। तत्कालीन बीएसए ने हाई कोर्ट के आदेश पर एसडीआई कायमगंज को नियमित वेतन भुगतान के निर्देश दिए। लेकिन प्रभारी इंचार्ज झब्बूपुर और एबीएसए कायमगंज ने बीएसए के आदेश का पालन नहीं किया।

कई प्रार्थना पत्र दिए नहीं हुई सुनवाई

इस संबंध में उन्होंने कई प्रार्थना पत्र दिए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं भी। एबीएसए कायमगंज कार्यालय में एबीएसए से मुलाकात के दौरान उनका उपहार सुनाया गया मानसिक आत्महत्या के लिए प्रेरित किया गया। बीते 25 सितंबर को बीएसए कार्यालय पहुंचे तो वहां पर भी मेरे साथ यही व्यवहार हुआ। अनिल कुमार त्रिपाठी का उपचार लोहिया अस्पताल में चल रहा है।

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क्या कहते हैं बीएसए?

इस संबंध में बीएसए गौतम प्रसाद ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी हुई है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक ने योगदान आख्या नहीं दी। जिससे उनका वेतन निर्गत नहीं हुआ। मामला 8 साल पुराना हो गया है। सचिव को पत्र भेज कर मामले की जानकारी दी गई है। आदेश का इंतजार हो रहा है। ‌