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Kalashtami 2022: कालाष्टमी पर कालभैरव को प्रसन्न करने के उपाय और प्रभाव

- कालाष्टमी (Kalashtami) यानि काल भैरव (kaal bhairav / Kaal Bhairav) की जन्मतिथि

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Deepesh Tiwari

Nov 14, 2022

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Kalashtami 2022: भगवान शिव जी का रौद्र रूप काल भैरव (kaal bhairav / Kaal Bhairav) को माना जाता है। भैरव की पूजा का सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व है। काल भैरव के जन्मतिथि (Kalashtami) के रूप में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व इस साल यानि 2022 में बुधवार,16 नवंबर को मनाया जाएगा।

भैरव की जन्मतिथि को काल भैरव (kaal bhairav) अष्टमी, कालाष्टमी (Kalashtami) जैसे नामों से भी जाना जाता है। शिव से उत्पत्ति होने के कारण इनका माता के गर्भ से जन्म नहीं हुआ, जिस कारण इन्हें अजन्मा माना जाता है। इन्हें काशी के कोतवाल (Baba Kal Bhairav Varanasi) तो उज्जैन में इन्हें शहर का कोतवाल के नाम से भी जाना जाता है और ये अपने भक्त की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

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मान्यता है कि भगवान शिव के रौद्र अवतार यानि काल भैरव (kaal bhairav) को खुश करने से जीवन की कई बाधाएं दूर हो जाएंगी।

काल भैरव (kaal bhairav / Kaal Bhairav) को प्रसन्न करने के उपाय
भगवान भैरव का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा के वक्त उन्हें पुष्प, फल, नारियल, पान, सिंदूर आदि चढ़ाना चाहिए। वहीं भगवान भैरव (kaal bhairav) की कृपा पाने के लिए उनके मंत्र ॐ काल भैरवाय नमः और ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय, कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा का जाप करें।

मान्यता है कि भगवान भैरव (kaal bhairav) की पूजा में उनके यंत्र का भी बहुत महत्व है। ऐसे में विधि-विधान से श्री भैरव यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करवानी चाहिए।

काल भैरव (kaal bhairav) महादेव के ही रूप हैं, इसलिए कालाष्टमी (Kalashtami) के दिन शिवलिंग की पूजा करना भी शुभ माना गया है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा के वक्त 21 बेल पत्रों पर चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

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श्री बटुक भैरव आपदुद्धारक मंत्र (ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा) के जाप से शनि की साढ़े साती, ढैय्या, अष्टम शनि और अन्य ग्रहों के अरिष्ट का नाश होता है और माना जाता है कि इससे शनिदेव अनुकूल होते हैं।

ये होता है असर - Effects of kaal bhairav Puja

ग्रह-दोष होंगे दूर : जिन व्यक्तियों की जन्म कुंडली में शनि, मंगल, राहु तथा केतु आदि पाप ग्रह अशुभ फलदायक हों, नीचगत अथवा शनि की साढ़े-साती या ढैय्या से पीड़ित हों, उन्हें भैरव की जन्मतिथि (Kalashtami) या किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, को बटुक भैरव मूल मंत्र की एक माला (108 बार) प्रारम्भ कर प्रतिदिन रूद्राक्ष की माला से 40 जाप करें, माना जाता है कि इससे जातक को अवश्य ही शुभ फलों की प्राप्ति होगी।

अकाल मृत्यु से बचाव : काल भैरव (kaal bhairav / Kaal Bhairav) के जन्मदिन (Kalashtami) के अवसर पर भैरव जी के मंदिर जाकर विधि-विधान से पूजा अवश्य करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जातक को उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भैरवनाथ जी (kaal bhairav / Kaal Bhairav) के सामने दीप भी जलाना विशेष माना जाता है, मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान महाकाल अपने भक्तों की अकाल मृत्यु से सुरक्षा करते हैं।

दांपत्य जीवन में सुख-शांति : वहीं जो लोग दांपत्य जीवन में हैं, मान्यता है कि उन्हें भी सुख-समृद्धि के लिए काल भैरव (kaal bhairav) की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इसके लिए भैरव जी की जन्मतिथि (Kalashtami) के दिन शाम के समय, शमी वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से रिश्तों में प्रेम और बढ़ता है।

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