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अष्टमी एवं नवमी तिथि को सुबह-शाम परिवार सहित कर लें इस स्तुति का पाठ, माँ दुर्गा हर लेंगी सारे संकट

Maa Durga Stuti Paath Ashtami, Navami Tithi : अष्टमी एवं नवमी तिथि को सुबह-शाम परिवार सहित कर लें इस स्तुति का पाठ, माँ दुर्गा हर लेंगी सारे संकट

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भोपाल

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Shyam Kishor

Oct 05, 2019

अष्टमी एवं नवमी तिथि को सुबह-शाम परिवार सहित कर लें इस स्तुति का पाठ, माँ दुर्गा हर लेंगी सारे संकट

अष्टमी एवं नवमी तिथि को सुबह-शाम परिवार सहित कर लें इस स्तुति का पाठ, माँ दुर्गा हर लेंगी सारे संकट

शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि 6 अक्टूबर (रविवार) एवं नवमी तिथि 7 अक्टूबर (सोमवार) को सुबह एवं शाम को आद्यशक्ति माँ दुर्गा भवानी की इस स्तुति का पाठ अपने घर में ही परिवार के सभी सदस्य अपनी कामना पूर्ति की प्रार्थना करते हुए मिलकर करें। इस स्तुति को करने से पहले माता रानी का विधिवत पंचोपचार पूजन करें। इस स्तुति का पाठ देवताओं पर जब-जब संकट आया तब-तब उन्होंने किया था और माँ दुर्गा भवानी ने उनके संकटों को दूर कर उनकी हर इच्छा पूरी की थी।

।। दुर्गा जी की इच्छा पूर्ति स्तुति पाठ ।।

जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय।
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

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आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।
अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।
कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।
मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।
तू वाँछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।
तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।
विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

शारदीय नवरात्रि : देवी कवच के पाठ से रक्षा के साथ हर कामना पूरी करती है माँ जगदंबा

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली, कमला तू वरदे॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।
भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय।।

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