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अयोध्या की रामलीलाओं में मुस्लिम युवक निभा रहे है महत्वपूर्ण किरदार

पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी में अयोध्या में कई मुस्लिम युवक रामलीलाओं के मंचन में महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं

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Sunil Sharma

Sep 27, 2017

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पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी में अयोध्या में कई मुस्लिम युवक रामलीलाओं के मंचन में महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। रामलीलाओं और दुर्गा पूजा के आयोजन में जिले में गंगा जमुनी तहजीब पर्यटकों को खासी आकर्षित कर रही है। हिन्दुओं के कंधे से कंधा मिलाकर मुस्लिम युवक साथ चल रहे हैं। शहर में लगभग हर एक रामलीला के मंचन में मुस्लिम युवक रोल अदा कर रहे हैं।

जाति-धर्म का बंधन तोड़कर मुमताजनगर ग्राम सभा के हिन्दू-मुस्लिम आपसी एकता और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए रामलीला में मुस्लिम वर्ग के तमाम लोग न सिर्फ विभिन्न पात्रों का किरदार अदा कर रहे हैं बल्कि इनमें से कई ने तो मांसाहार तक त्याग दिया है। पिछले 53 वर्ष से आयोजित हो रही इस रामलीला के मुखिया भी मुस्लिम हैं। श्री रामलीला रामायण समिति मुमताजनगर के अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन डॉ. सैय्यद माजिद अली करीब 40 वर्षों से निभा रहे हैं। डॉ. माजिद अली ने बताया कि इसके पहले उनके पिता स्व. वाजिद अली यह जिम्मेदारी निभाते थे।

डॉ. अली ने बताया कि इस रामलीला में कौन हिन्दू है या कौन मुसलमान है इसकी जानकारी आप नहीं कर सकते हैं बल्कि सभी लोग इंसान हैं। इन दिनों चल रहे रामलीला मंचन में रावण के मंत्री का किरदार इखलाक अहमद, लक्ष्मण की पत्नी का किरदार उर्मिला का शाहीनूर, और सुषेन वैद्य का रोल अन्ना निभा रहे हैं। इस रामलीला में जुड़वा भाई मो. सैद, मो. कैफ, मीर साधू और सलमान उर्फ नब्बू, नारान्तक की भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि एखलाक, नियाज अहमद, शाहिद नफीस, जाबिर और रियाज भी मंचन में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें से कई कलाकार अभी पढ़ाई भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि रामलीला मंचन से जुड़े मुस्लिम युवकों ने मांसाहार छोड़ दिया है। सलमान उर्फ नब्बू और मो. शाहीनूर का कहना है कि राम दल से जुड़े पात्रों की श्रद्धालु आरती उतारते हैं, इस वजह से हमने उनकी आस्था को देखते हुए मांसाहार त्याग दिया है। कई अन्य मुस्लिम युवकों ने भी इन दिनों मांसाहार छोड़ दिया है।

मोहम्मद सैफ और मोहम्मद कैफ ने कहा कि रामलीला में मंचन के दौरान जो भी भूमिका उन्हें मिलती है वे बखूबी उसे निभाते हैं। हम दोनों भाई नल-नील बनते हैं तो कभी साधू वहीं सलमान उर्फ नब्बू और मोहम्मद शाहीनूर कहते हैं कि भगवान राम, लक्ष्मण व सीता तथा रामदल से जुड़े पात्रों की लोग आरती उतारते हैं और चरण छूते हैं। ऐसे में हमें भी भक्तों की आस्था का ख्याल रखना है। बस इसी वजह से रोज रामायण के मंचन के पहले नहा-धो करके किरदार निभाता हूँ और माँस-मदिरा का सेवन नहीं करता हूँ। रावण बनने वाले चन्द्रशेखर कहते हैं कि एक-दूसरे के त्यौहारों के साथ ही हर सुख-दुख में हिस्सा लेते हैं।

समिति के मंत्री एवं प्रधान शिवशंकर मौर्य ने बताया कि गाँव के हिन्दू-मुस्लिम युवक दशहरा, होली, दीवाली एक साथ मनाते हैं। यहाँ तक कि मुस्लिम हमारे साथ होली खेलते हैं और हिन्दू मोहर्रम में ताँशा-झाँसा बजाते हुए कर्बला तक जाते हैं। इन लोगों से मंदिर-मस्जिद विवाद से कोई मतलब नहीं है। एक सौहाद्र्रपूर्ण वातावरण में हिन्दू, मुस्लिम त्यौहार को शांतिपूर्ण ढंग व परिवार के साथ मनाते हैं जिससे देश और विदेश में हिन्दू-मुस्लिम आपसी भाईचारे का एक सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बन जाता है।