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रविवार 24 नवंबरः प्रदोष काल में करें यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम

Pradosh Vrat : रविवार 24 नवंबरः प्रदोष काल में करें यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम

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भोपाल

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Shyam Kishor

Nov 23, 2019

रविवार 24 नवंबरः प्रदोष काल में करें यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम

रविवार 24 नवंबरः प्रदोष काल में करें यह उपाय, शिवजी बना देंगे सारे काम

24 नवंबर मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रविवारीय प्रदोष व्रत का दिन है। वैसे तो प्रदोष काल व्रत का दिन हर महीने आता है, लेकिन अगर यह दिन रविवार के दिन हो तो इसका महत्व सैकड़ों गुना अधिक हो जाता है। शास्त्रों में शिव पूजा के अनेक विधान और समय के बारे में उल्लेख आता है लेकिन जो फल महाशिवरात्रि या सावन में पूजा करने से मिलता है वही फल रविवारीय प्रदोष का व्रत रखकर शिव पूजा करने से प्राप्त होता है। जानें कैसे करना है प्रदोष काल में शिवजी का विशेष पूजन और उसका लाभ।

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प्रदोष काल में शिव पूजा

सबसे उत्तम व पवित्र समय प्रदोष काल बताया गया है, जो दिन का अंत और रात्रि के आगमन के बीच का समय होता है वही प्रदोष काल कहलाता है। इस काल में की गई शिव पूजा का फल अनंत गुना बड़ जाता है और इस समय की गई शिव जी की पूजा आराधना से साधक की हर इच्छा पूरी होने लगती है।

दरिद्रता से मिलती है मुक्ति

दरिद्रता और ऋण के भार से दु:खी व संसार की पीड़ा से व्यथित मनुष्यों के लिए प्रदोष पूजा व व्रत पार लगाने वाली नौका के समान है। ‘प्रदोष स्तोत्र’ में कहा गया है- यदि दरिद्र व्यक्ति प्रदोष काल में भगवान गौरीशंकर की आराधना करता है तो वह धनी हो जाता है और यदि राजा प्रदोष काल में शिवजी की प्रार्थना करता है तो उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है, वह सदैव निरोग रहता है, एवं राजकोष की वृद्धि व सेना की बढ़ोत्तरी होती है।

ऐसे करें प्रदोष काल में शिव पूजा

1- सूर्यास्त के 15 मिनट पहले स्नान कर धुले हुये सफेद वस्त्र पहनकर- शिवजी को शुद्ध जल से फिर पंचामृत से स्नान कराये, पुन: शुद्ध जल से स्नान कराकर, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, इत्र, अबीर-गुलाल अर्पित करें। मंदार, कमल, कनेर, धतूरा, गुलाब के फूल व बेलपत्र चढ़ाएं, इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल व दक्षिणा चढ़ाकर आरती के बाद पुष्पांजलि समर्पित करें।

2- उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान उमामहेश्वर का ध्यान कर प्रार्थना करें- हे उमानाथ- कर्ज, दुर्भाग्य, दरिद्रता, भय, रोग व समस्त पापों का नाश करने के लिए आप पार्वतीजी सहित पधारकर मेरी पूजा स्वीकार करें।

प्रार्थना मन्त्र
‘भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते।
रुद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशिमौलिने।।
उग्रायोग्राघ नाशाय भीमाय भयहारिणे।
ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नम:।।
पूजा करने के बाद 108 बार "ऊँ नमः शिवाय" का जप रुद्राक्ष की माला से जप करें।

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