
Festival
गाडरवारा। पावन पर्वो की श्रृंखला में राजस्थानी मारवाड़ी समाज में प्रचलित त्यौहारों में से सातुड़ी तीज का त्यौहार समूहों में अनेक स्थानों पर परंपरागत ढंग से उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस दिन मिट्टी का तालाब बनाकर नीम की डाली लगाकर प्रतीक रूप में नीम्बड़ी माता की पूजा अर्चना कर अपने सौभाग्य एवं परिवार की खुशहाली के लिए भादों की कृष्ण पक्ष में यह त्यौहार अनेक वर्षो से समाज में मनाया जा रहा है। विवाहित महिलाएं सौभाग्यवती परिधान चूड़ी, बिंदी आदि का श्रृंगार कर पूजा में शामिल होती है। पूजा उपरांत चन्द्रदर्शन करने के उपरांत अपना उपवास व्रत पूर्शा कर चना, गेंहू, चांवल का सत्तू खाती है। सत्तू को पुरूष वर्ग चांदी के सिक्के आदि से बंधाते हैं। नवविवाहित महिलाओं का उजिना कार्यक्रम भी होता है जिनमें सत्रह विवाहित महिलाओं को सत्तू के पिंडे देकर उनका उपवास व्रत पूरा कराया जाता है। महिलायें आपस में एक दूसरे के घर जाकर वरिष्ठ महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर त्यौहार की पावन रस्म पूर्शा किया करती हैं। कृष्णादेवी मौलासरिया चांवडी के आवास पर उक्त पूजा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। विवाहित महिलाएं सौभाग्यवती परिधान चूड़ी, बिंदी आदि का श्रृंगार कर पूजा में शामिल होती है। पूजा उपरांत चन्द्रदर्शन करने के उपरांत अपना उपवास व्रत पूर्शा कर चना, गेंहू, चांवल का सत्तू खाती है। सत्तू को पुरूष वर्ग चांदी के सिक्के आदि से बंधाते हैं। नवविवाहित महिलाओं का उजिना कार्यक्रम भी होता है जिनमें सत्रह विवाहित महिलाओं को सत्तू के पिंडे देकर उनका उपवास व्रत पूरा कराया जाता है। महिलायें आपस में एक दूसरे के घर जाकर वरिष्ठ महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर त्यौहार की पावन रस्म पूर्शा किया करती हैं। कृष्णादेवी मौलासरिया चांवडी के आवास पर उक्त पूजा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। महिलायें आपस में एक दूसरे के घर जाकर वरिष्ठ महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर त्यौहार की पावन रस्म पूर्शा किया करती हैं। कृष्णादेवी मौलासरिया चांवडी के आवास पर उक्त पूजा का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
Published on:
30 Aug 2018 05:59 pm
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