
Rang Panchami 2023 Interesting Facts: पांच दिवसीय पर्व होली होली का आज चौथा दिन है। हर साल धुलेटी यानी रंगों वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, फिर होली वाले दिन रंग-गुलाल के साथ होली खेली जाती है। इस साल यह पर्व 7 मार्च 2023 को होलिका दहन के साथ शुरू हुआ, 8 मार्च को होली खेली गई। वहीं होली के पांचवें दिन यानी चैत्र कृष्ण पंचमी को रंग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व इस बार रविवार के दिन मनाया जा रहा है। आपको बता दें कि रंग पंचमी का पर्व देवी-देवताओं को समपर्ति पर्व माना गया है। देशभर में रंग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने के कारण इसे कृष्ण पंचमी भी कहा जाता है। इसके अलावा रंगपंचमी को श्रीपंचमी और देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। पत्रिका.कॉम के इस लेख में हम आपको बता रहे हैं रंग पंचमी का महत्व, यह कब से मनाई जाने लगी साथ ही इससे जुड़ी एक पौराणिक रोचक कथा भी...
यहां जानें रंग पंचमी से जुड़ी खास तथा रोचक बातें
- माना जाता है कि रंग पंचमी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा के साथ होली खेली थी, इसलिए रंग पंचमी के दिन श्रीकृष्ण के साथ राधा-रानी की भी पूजा की जाती है।
- इसीलिए इस दिन श्री कृष्ण और राधा-रानी को रंग अर्पित किए जाने की परम्परा है।
- कई राज्यों में रंग पंचमी के दिन जुलूस निकाले जाते हैं। इनमें हुरियारे अबीर गुलाल उड़ाते हैं।
- रंग पंचमी पर चारों तरफ अबीर, गुलाल उड़ता हुआ नजर आता है।
- माना जाता है कि इस दिन वातावरण में उड़ते हुए गुलाल से व्यक्ति के सात्विक गुणों में अभिवृद्धि होती है। उसके तामसिक और राजसिक गुणों का नाश हो जाता है। इसीलिए इस दिन शरीर पर रंग न लगाकर वातावरण में रंग बिखेरा जाता है।
- ये त्योहार आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना गया है।
- वहीं शास्त्रों में इस त्योहार को अनिष्टकारी शक्तियों से विजय पाने का दिन माना गया है।
- रंग पंचमी का पर्व महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है।
- यहां लोग एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाते हैं।
- घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही दोस्त और रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाता है।
- लोग नृत्य, संगीत का आनंद लेते हुए रंगपंचमी का उत्सव मनाते हैं।
- मध्यप्रदेश के इंदौर में रंगपंचमी पर गुलाल उड़ाते हुए शोभायात्रा निकाली जाती है।
- इस शोभा यात्रा को 'गेर' कहा जाता है।
रंग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा जरूर पढ़ें
एक पौराणिक कथा के मुताबिक, होलाष्टक के दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था, जिसके कारण देवलोक में सब दुखी थे। लेकिन देवी रति और देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने कामदेव को दोबारा जीवित कर देने का आश्वासन दिया। इसके बाद सभी देवी-देवता प्रसन्न हो गए और रंगोत्सव मनाने लगे। माना जाता है कि इसके बाद से ही पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाने लगा और यह परम्परा आज तक कायम है।
Updated on:
11 Mar 2023 01:37 pm
Published on:
11 Mar 2023 01:25 pm
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