
Shadow of lunar eclipse on Guru Purnima 2020
गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि गुरु ही भगवान के बारे में बताते हैं और भगवान की भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के बिना ज्ञान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।
इस दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व होता है। भारत में इस दिन को बहुत श्रद्धा- भाव से मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों में भी गुरु के महत्व को बताया गया है। आइए जानते हैं इस साल कब मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व और इस दिन का महत्व...
गुरु पूर्णिमा तिथि
हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 5 जुलाई को पड़ रही है। 5 जुलाई रविवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा।
वहीं 5 जुलाई को ही चंद्रग्रहण भी होगा। यह ग्रहण दक्षिण एशिया के अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल नहीं माना जाएगा। इसी दिन गुरु पूर्णिमा है, चंद्रग्रहण का असर न होने से गुरु पूर्णिमा श्रद्धाभाव से मनाई जाएगी।
गुरु पूर्णिमा मुहूर्त 2020
गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 4 जुलाई 2020 को 11बजकर 33 मिनट से
गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त - 5 जुलाई 2020 को 10 बजकर 13 मिनट पर
प्राचीन काल से मनाया जा रहा है पर्व
गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। धार्मिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में गुरुकुल में शिष्य इस दिन को बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाते थे। इस दिन गुरु की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता था।
ऐसे शुरु हुआ आषाढ़ी पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा उत्सव...
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास (महर्षि वेद व्यास) का जन्म आषाढ़ की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। वेदव्यास को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए उनके जन्मोत्सव को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस साल 5 जुलाई को आषाढ़ी पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा।
महर्षि वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है, जिस वजह से गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन का बहुत अधिक धार्मिक महत्व होता है।
कृष्ण द्वैपायन व्यास संस्कृत के महान विद्वान थे। हिंदू धर्म में 18 पुराणों का जिक्र है, जिनके रचयिता भी महर्षि वेदव्यास ही हैं। साथ ही वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी कृष्ण द्वैपायन व्यास जी को जाता है, जिस वजह से इनको वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है।
विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकाल सकते हैं गुरु...
गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार गुरु की कृपा से सब संभव हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु व्यक्ति को किसी भी विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकाल सकते हैं।
ऐसे समझें गुरु का अर्थ...
गुरु में 'गु' शब्द का वास्तविक अर्थ होता है अंधकार और 'रु' का मतलब निरोधक। अर्थात जो अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है उसे ही गुरु कहा गया है। गुरु अपने शिष्यों को हर संकट से बचाने के लिए प्रेरणा देते रहते हैं, इसलिए हमारे जीवन में गुरु का अत्यधिक महत्व है।
मंत्र जाप से मिलेगी सफलता
गुरु पूर्णिमा के दिन साक्षात गुरुदेव अथवा गुरु के छायाचित्र की पूजा-अर्चना करके गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन मंत्रों का जाप करने से सफलता के द्वार खुलेंगे और बल बुद्धि में वृद्धि होगी।
कालसर्प दोष से राहत...
यदि किसी की कुंडली में काल सर्प दोष हो तो इससे छुटकारा पाने के लिए गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा करके आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
साल 2020 का तीसरा चंद्रग्रहण पर गुरु पूर्णिमा...
वर्ष 2020 के जुलाई की शुरुआत में ही साल का तीसरा चंद्र ग्रहण (Lunar eclipse) 5 जुलाई, रविवार को लगेगा। ये ग्रहण गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर पड़ने वाला है। ऐसे में इस चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) को वैज्ञानिकों के साथ-साथ, ज्योतिषी विशेषज्ञ भी एक अहम घटना के रूप में देख रहे हैं...
: यह चन्द्र ग्रहण रविवार सुबह 8 बजकर 38 मिनट से शुरू होगा, जो 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा.
: विशेषज्ञों अनुसार 10 बजे ये ग्रहण अपने चरम पर पहुंचेगा.
: 5 जुलाई 2020 को घटित होने वाले ग्रहण की दृश्यता, अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम यूरोप और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में होगी।
: हिंदू पंचांग के अनुसार, यह उपछाया चंद्र ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दौरान, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को घटित होगा, इसलिये इस ग्रहण के दौरान धनु राशि के जातकों के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।
Updated on:
28 Jun 2020 07:38 pm
Published on:
29 Jun 2020 04:12 am
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